जिले में ट्रांसफार्मरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन किसानों को कमी की बात कहकर टरकाया जा रहा है। सुविधा शुल्क लेकर ही किसानों को ट्रांसफार्मर दिया जाता है। इस मामले में राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने बिजली कर्मचारियों की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने का निर्णय लिया है।
निगम के अधिकारियों की मानें तो स्टोर में 25 केवीए, 63 केवीए, 100 केवीए व 250 केवीए के ट्रांसफार्मरों की कोई कमी नहीं है। विषम परिस्थितियां भी हो तो मात्र दो दिन में फुंके ट्रांसफार्मर के बदले नया ट्रांसफार्मर लग जाता है।
लेकिन स्टोर पर मौजूद कर्मचारी किसानों को ट्रांसफार्मर की कमी दिखाकर किसानों से अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। कमी दिखाकर किसानों को 15 से 20 दिन चक्कर लगवाए जाते हैं। थक हारकर किसान को सुविधा शुल्क देकर ही दूसरा ट्रांसफार्मर मिलता है।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष व गांव वझीलपुर निवासी ज्ञानेंद्र त्यागी कहते हैं कि ट्रांसफार्मर के मामले में किसानों का शोषण पहले से ही होता आ रहा है। अधिकारियों से बार-बार शिकायत के बावजूद इस मामले में कार्रवाई नहीं हो रही है। अब इस मामले को संस्था के माध्यम से उच्चाधिकारियों के समझ उठाया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर फुंकने से किसानों को जो समस्या होती है। उसकी अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारी भरकम ट्रांसफार्मर को किसान खुद ही अपने खर्चे से उतारकर स्टोर तक लाते हैं। यह सब स्थानीय लाइनमैन की साठगांठ से होता है। लाइनमैन और स्टोर कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसे हालात पैदा किए जाते हैं। जिससे उनकी जेबें गर्म हो सकें।
अधिशासी अभियंता प्रिंस कुमार गौतम का कहना है कि स्टोर में ट्रांसफार्मर की कोई कमी नहीं है। अगर किसानों को परेशान किया जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। वह खुद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से बात करेंगे।