गंगा घाट तीरे सुरक्षा के नाम पर पालिका की ओर से हर माह लाखों बहाने के बाद भी श्रद्धालुओं की डूबकर मौत होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसके चलते जिला प्रशासन के दावे और पालिका के इंतजाम की पोल खुल गई है।
बता दें कि ब्रजघाट गंगा में आए दिन डूबने से श्रद्धालुओं की मौत हो रही है। इसको लेकर प्रदेश सरकार भी नाराजगी जता चुकी है। तीन मई को निरीक्षण करने आए एडीएम रजनीश राय और एएसपी आरएन यादव ने पालिका अफसरों को गंगा के तीरे बैरिकेडिंग को और चाक चौबंद करने के साथ आदेश दिए थे।
साथ ही डूबने वालों को बचाने में खामी सामने आने पर ठेकेदार समेत पालिका प्रशासन के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। लेकिन बेपरवाह पालिका कर्मियों ने इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। शनिवार को भी गंगा में डूबने वाले संभल के दो चचेरे भाइयों हिमांशु और शिवम को बचाने के लिए लोग चीखते चिल्लाते रहे।
लेकिन मौके पर कोई पालिका के गोताखोर मौजूद नहीं थे। जब तक मल्लाह वहां पहुंचे तेज धारा में दोनों मासूम गायब हो चुके थे। व्यापारी नेता मूलचंद सिंघल ने आरोप लगाया है कि पालिका प्रशासन प्रतिमाह बैरिकेडिंग समेत नाव और गोताखोरों की तैनाती पर लाखों रुपये खर्च करती है।
इसके बाद भी गंगा में डूबकर होने वाले मौत की घटनाएं कम नहीं हो रही है। इसलिए जिला प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए। एसडीएम शमशाद हुसैन का कहना है कि पालिका के गोताखोरों की लापरवाही बरतने के आरोपों की जांच कराई जाएगी।