परिवहन विभाग ने डीएल बनवाने की प्रक्रिया सौ फीसदी ऑनलाइन करने की योजना तैयार कर ली है। इस प्रक्रिया को अगस्त-सितंबर तक लागू करने की तैयारी है।
इसके बाद आवेदक को आरटीओ आफिस तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका परीक्षण शुरू कर दिया गया है। एनआईसी दिल्ली की टीम ने आरटीओ ऑफिस पहुंचकर सॉफ्टवेयर को परिवहन विभाग के सारथी सॉफ्टवेयर से लिंक करने की विधि की जानकारी ली।
परिवहन विभाग की ज्यादातर योजनाओं को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है। केंद्र और राज्य परिवहन विभाग मिलकर इसको जल्द शुरू करने के प्रयास में हैं। परिवहन विभाग की सबसे ज्यादा शिकायतें डीएल को लेकर हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदकों को मारामारी का सामना करना पड़ता है। आरटीओ ऑफिसों में भ्रष्टाचार का मुख्य कारण भी डीएल सेक्शन को माना जाता है।
ज्यादातर डीएल दलालों के माध्यम से बनते हैं। परिवहन विभाग ने अब डीएल की प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त कराने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है।
इस योजना में लर्निंग और परमानेंट दोनों तरह के डीएल का आवेदन और फीस ऑनलाइन किए जाएंगे। डाक्यूमेंट की स्कैन कापी या नंबर आवेदन के साथ डाला जाएगा।
इनकी जांच विशेषज्ञ ऑनलाइन ही करा लेंगे। लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट भी ऑनलाइन अपने कंप्यूटर से ही दिया जा सकेगा। परमानेंट लाइसेंस के लिए वाहन ड्राइविंग कालेज का प्रमाणपत्र लगाना होगा।
परिवहन विभाग के आईटी हेड प्रवीण त्यागी ने बताया कि आवेदक का फोटो और थंब इंप्रेशन उसके आधार कार्ड से उठा लिया जाएगा।
इस तकनीक का प्रयोग परिवहन विभाग गुजरात में करा चुका है। जल्द ही यूपी-केंद्र के सॉफ्टवेयर को लिंक करके आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।