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Hapur News: शाम 5.38 बजे से 7.34 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त

Sat, 11 Nov 2023 09:41 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। रोशनी का पर्व दिवाली कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को आज मनाया जाएगा। शाम 5.38 बजे से 7.34 बजे तक स्थिर लग्न, शुभ चौघडिय़ा, सौभाग्य योग में पूजन करना शुभ रहेगा। रात 7.34 से 10.24 बजे तक पूजन व अन्य शुभ कार्य भी कर सकते हैं। मध्यरात्री 12.10 बजे से 2.27 बजे तक स्थिर लग्न महानिशीथ काल मुहूत रहेगा। इसमें लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और माता सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी।
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ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि दिवाली पर दीप दान करने का विशेष महत्व होता है। दीप दान तुलसी, पीपल, बैल, आंवला, शनि वृक्ष, चौराहा, छत, विष्णु, शिव अथवा देवालय, इष्ट देवता, कुलदेवता, ग्राम देवता, स्थान देवता, दिकपाल, लोकपाल, गौशाला, गंगा, यमुना नदियों में कर सकते हैं। महालक्ष्मी की बड़ी बहन सुरभी गऊ है, क्योंकि सुरभी गऊ की उत्पति भी समुंद्र मंथन से हुई थी। इस दिन गौ सेवा व गौशाला पर दीपदान अवश्य करना चाहिए।

पूजन विधि-
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि भारतीय देसी गाय के गोबर में लक्ष्मी का वास बताया गया है। इसलिए गोबर और गोमूत्र जल में मिलाकर उससे पोछा घर में लगा सकते हैं जो हमारे घर से नकारात्मक उर्जा समाप्त कर सकारात्मक सुख शांति में वातावरण को बनाने का संयोग बनाएगा। पश्चिम दिशा में देसी गाय के गोबर से लीप कर उसके ऊपर सतनजा रखें और उसके ऊपर रात्रि पर्यंत अखंड तेल का दीपक प्रज्वलित करें जो सुबह 6 बजे तक जलते रहे और उस दीपक को लक्ष्मी स्वरूप मानकर उसका पूजन करें।
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एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और एक बड़े कटोरे या थाली में चांदी या धातु निर्मित गणेश, लक्ष्मी, कुबेर व अन्य विग्रह को या श्री यंत्र कुबेर यंत्र गणपति यंत्र को स्थापित कर उनका पंचामृत से क्रम पूर्वक स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर चौकी पर स्थापित कर वस्त्र माला आदि से अलंकृत करें। रोली, चंदन, अक्षत पुष्प, धूप, दीप नैवेद्य, फल, पान दक्षिणा इत्यादि के द्वारा क्रम पूर्वक गणपति, लक्ष्मी का पूजन करें। इसके अलावा रामचरितमानस का पाठ या अन्य किसी भी प्रकार के मंत्र अनुष्ठान इस काल में जाप करना श्रेष्ठ रहता है। मां शारदा और महाकाली की पूजा भी विशेष अर्धरात्रि की बेला में शुभ होती है।
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