साहिबाबाद। शालीमार गार्डन स्थित श्मशान घाट का संचालन करने वाली दो समितियों के बीच विवाद हुआ तो महापौर ने बृहस्पतिवार को श्मशान घाट पर ही ताला लटकवा दिया। शाम के समय श्मशान घाट का संचालन करने वाली दो समितियों के बीच शुक्ल के लिए विवाद हो गया था। लोगों ने बताया कि एक समिति शुल्क श्मशान घाट के संचालन के लिए शुल्क लेना चाहती थी, जबकि दूसरी समिति श्मशान घाट का संचालन निशुल्क करना चाहती थी। विवाद बढ़ने पर मामला महापौर तक पहुंचा। इसके बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए घाट पर ताला लगा दिया।
शालीमार गार्डन मेन के नगर निगम पार्षद रवि भाटी ने मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि करीब 1975 में शिव शक्ति श्मशान सेवा समिति ने श्मशान घाट की निर्माण किया था।
शिव शक्ति समिति ने कोरोना काल के दौरान तेरह-तेहर समिति के निवेदन पर श्मशान घाट का संचालन उसे सौंप दिया था। पार्षद रवि ने बताया कि तेरह-तेरह समिति के अध्यक्ष सरदार हरदीप ने सेवा भाव के लिए संचालन को अपने हाथों में लिया था, लेकिन निशुल्क श्मशान घाट पर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया। शुल्क वसूले जाने की सूचना जब शिव शक्ति श्मशान सेवा समिति तक पहुंची तो समिति ने श्मशान घाट का संचालन वापस अपने हाथों में लेने की बात कही। जिसे लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। वहीं, शालीमार गार्डन निवासी सोनू भाटी ने बताया कि इलाके में कोई भी श्मशान घाट नहीं है। लोग शव दहन के लिए हिंडन श्मशान पर जाते हैं। स्थानीय निवासी सरदार सिंह भाटी ने बताया कि करीब 1975 में इस श्मशान घाट का निर्माण हुआ था। लेकिन इसमें कम संख्या में लोग शव दहन करने आते हैं। इसका उपयोग कोरोना काल में ही किया गया था। अब इसका संचालन तेरह-तेरह समिति द्वारा किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि श्मशान घाट पर समिति द्वारा पांच हजार से लेकर सात हजार रुपये की वसूली की जा रही है। दोनों समितियों में पैसे की वसूली को लेकर विवाद हो गया। वहीं मामला महापौर तक पहुंचने पर निगम द्वारा श्मशान पर ताला लगाकर बंद कर दिया गया। मामले पर जानकारी देते हुए महापौर सुनीता दयाल ने बताया कि शालीमार गार्डन में कोई भी श्मशान घाट नहीं है। वह जगह नगर निगम की है। अवैध रूप से समितियों की ओर से श्मशान घाट का संचालन किया जा रहा था।