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धनतेरस आज, बाजार हुए गुलजार

Thu, 27 Oct 2016 09:52 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
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बाजार हुए गुलजार - फोटो : अमर उजाला
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धनतेरस और दिवाली की खरीदारी के चलते बाजारों की रौनक बढ़ गई है। शुक्रवार को धनतेरस है और रविवार को दिवाली मनाई जाएगी। बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और वाहनों की जमकर लोग खरीदारी कर रहे हैं।
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लोग अपने घरों को भी सजाने और संवारने में जुटे हुए हैं। साथ ही महीने के अंत में दिवाली पड़ने से नौकरीपेशा वर्ग को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। धनतेरस और दिवाली पर परंपरा है कि नईं वस्तु की खरीदारी की जाए।

अपनी जेब के हिसाब से हर कोई कुछ न कुछ खरीदता है। बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, वाहन और मिठाई आदि बेचने वालों ने पूरी तैयारी कर ली है। धनतेरस पर बर्तन और सराफा बाजार में काफी चहल पहल है।
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टीवीएस शोरूम के मालिक बीपी त्यागी ने बताया कि धनतेरस पर इस बार स्कूटी और बाइक की बुकिंग लोगों ने पहले से ही करा ली है। हापुड़ हुंडई की संचालक मनीषा गोयल का कहना है कि इस सीजन में कंपनी ने नए-नए ऑफर दिए हैं, जिससे ग्राहकों में उत्साह है।

इलेक्ट्रॉनिक्स शो रूम के मालिक मूलचंद  गुप्ता ने बताया कि उपभोक्ताओं की पहली पसंद एलइडी टीवी है। वहीं, दूसरी ओर महीने के अंत में दिवाली पड़ने से आर्थिक तंगी और महंगाई के बावजूद लोग घरों की साफ-सफाई और पेंट आदि करने में लगे हैं।

पेंट विक्रेताओं के यहां काफी चहल-पहल है। साथ ही रंगाई का काम करने वाले श्रमिकों ने भी मजदूरी के रेट बढ़ा दिए हैं। गढ़ में दुकानदार कुलदीप ने बताया कि जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे दुकान पर ग्राहकों की संख्या बढ़ती जा रही है।

देश भर में चाइनीज आइटमों के विरोध के चलते इस बार चाइना के उत्पादों की बिक्री में कमी आई है। बाजारों में चाइनीज झालरों की भरमार होने के बावजूद मिट्टी के दिये इन पर भारी पड़ रहे हैं। 10 रुपये के दस छोटे दिये 10 रुपये के दो बड़े दिये बाजार में बिक रहे हैं।

दीपावाली के दिन खील-बताशे का प्रसाद वितरित किया जाता है। इसमें हाथी घोड़े के आकर की मिठाई भी बनाई जाती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में इसे काफी पसंद किया जाता है। समय के अनुसार इसमें भी बदलाव आ गए हैं।

किराना व्यापारी राजेंद्र ने बताया कि किसी समय यह बताशे, हाथी और घोड़े के आकार की मिठाई खांड से बनाई जाती थी। मगर अब खांड के स्थान पर चीनी से बने बताशे, हाथी घोड़ा प्रसाद के रूप में बंटने लगे।
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