गर्मी का मौसम आते ही आगलगी का सिलसिला शुरू हो जाता है। कभी फसल में आग तो कभी मकान, दुकान में आगलगी की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में जिले की लंबी चौड़ी सीमा के बीच लगने वाली आग को बुझाने के लिए संसाधनों का बेहद अभाव है।
नतीजतन, आग शीघ्र न बुझने के कारण क्षति ज्यादा होती है। नेशनल हाइवे 24 पर पिलखुवा से शुरू होकर गढ़, एनएच 235 पर धीरखेड़ा से शुरू होकर गुलावठी बार्डर तक हापुड़ जिले की सीमा लगती है।
ऐसे में आग की सूचना पर पहुंचने में फायर ब्रिगेड को शहरी क्षेत्र में ही लगभग 15 मिनट का समय लग जाता है। जबकि बाहरी क्षेत्र में तो दूरी और जाम से जूझते हुए फायरकर्मी आमतौर पर देर से ही पहुंच पाते हैं।
इतनी देर में आग भयंकर रूप धारण कर सब कुछ जला देती है। ऐसे में आग को रोकने के लिए फायर ब्रिगेड के पास संसाधनों का अभाव साफ नजर आता है। मंगलवार को भी नौ दुकानों में आग लगी तो सूचना मिलने पर छोटा फायर टैंकर मौके पर पहुंचा।
जबकि लोगों की भीड़ और फायर टैंकर बुलाने की मांग करता रहा। काफी देर बाद अन्य तीन फायर टैंकर मौके पर पहुंचे। लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था।
सीएफओ अनिमेष सिंह ने बताया कि फायर टैंकर बढ़ाने की मांग की जा चुकी है। शासन से स्वीकृति मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में आग की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए।
जिले की सुरक्षा के लिए गढ़ व हापुड़ में फायर स्टेशन हैं, लेकिन संसाधन की काफी कमी है। यहां मात्र एक सीएफओ, एक एफएसओ, पांच लेडी फायरमैन, छह चालक, 33 फायरमैन और तीन फायर टैंकर मौजूद हैं। जबकि पिलखुवा में एक टैंकर सुरक्षा की दृष्टि से अधिकारियों द्वारा खड़ा कराया जाता है।