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देसी नुस्खे के सहारे बुखार से जंग लड़ने को मजबूर ग्रामीण

Sat, 10 Sep 2016 07:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
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बुखार से जंग लड़ने को मजबूर ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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जिले में बुखार कहर बरपा रहा है। गांवों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीण देसी नुस्खे के सहारे बुखार और डेंगू से जंग लड़ने को मजबूर हैं। बनखंडा गांव में आलम यह है कि शायद ही कोई घर ऐसा होगा, जिसके सदस्य बुखार से पीड़ित न हों।
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वहीं, स्वास्थ्य अफसर मरीजों को उपकेंद्र या सीएचसी पर आकर इलाज कराने की हिदायत देने से नहीं चूक रहे हैं। बारिश का सीजन बीतने को है लेकिन बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालत यह है कि निजी, सरकारी अस्पताल बुखार के मरीजों से भरे पड़े हैं।

दूर दराज के गांवों में बुखार से पीड़ित मरीजों का हाल बेहाल है। उन्हें न तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही है और न ही उनके पास निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पैसे हैं।
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ऐसे में मरीज या तो झोलाछाप चिकित्सकों की शरण में जाने को मजबूर हैं या फिर देसी नुस्खे से खुद इलाज कर रहे हैं। बुखार के प्रकोप से बकरी के दूध की डिमांड इस कदर बढ़ गई है कि मरीजों को ढूंढे नहीं मिल रहा है।

इतना ही नहीं देहात में पपीते के पत्ते व गिलोय की बेल को रामबाण माना जाता है। इसी के चलते अब मरीज गली-गली ढूंढते फिर रहे हैं।

इसी तरह, जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित बनखंडा गांव में बुखार ने इस कदर कहर बरपा रखा है कि हर घर में मरीज पड़े हैं। स्वस्थ्य विभाग के अफसर उन्हें राहत दिलाने के बजाय स्वास्थ्य उपकेंद्र या सीएचसी पर आकर इलाज कराने की हिदायत दे रहे हैं।

उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रवीण शर्मा का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भी बुखार के मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। बनखंडा में जल्द ही कैंप लगवाकर मरीजों को दवाएं उपलब्ध करा दी जाएगी।
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