गढ़ रोड रेलवे फाटक पर बन रहे रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण में लगातार हो रही देरी से शहर का व्यापार प्रभावित हो रहा है। एक वर्ष के अंदर ओवर ब्रिज को पूरा करने के राज्य सेतु निगम के दावे हवाई साबित हुए हैं। पुल निर्माण में देरी से जिले के व्यापारियों, ग्रामीणों व शहरवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
सवा साल पहले गढ़ रोड स्थित रेलवे फाटक पर राज्य सेतु निगम द्वारा ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए पुल निर्माण का काम शुरू किया गया था। इसके लिए रेलवे फाटक वाले रास्ते को शुरुआत में बंद कर निर्माण शुरू किया गया।
राज्य सेतु निगम के अधिकारियों ने भी आपसी विचार विमर्श कर जनता को आश्वासन दिया था, कि लगभग एक वर्ष में इसका निर्माण पूरा कर लिया जायेगा। राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते रेलवे फाटक पर दुपहिया वाहनों को आने जाने के लिए रास्ता मिल गया,
लेकिन सवा साल बाद भी पुल निर्माण अधूरा होने के कारण शहर के व्यापारी व आम जनता परेशान है। गढ़ रोड की ओर आवागमन का कोई सही रास्ता न होने के कारण कारोबारियों तथा व्यापारियों का धंधा मंदा पड़ गया है। गुड़, बर्तन, लकड़ी, खल आदि के व्यापार के लिए देशभर में यहां से कारोबार किया जाता है।
आस पास के सैकड़ों गांवों के लोग अपने जरूरतों की खरीदारी करने हापुड़ आते थे। लेकिन अब इनका आना जाना लगभग बंद हो गया है। इतना ही नहीं रेलवे फाटक पार स्थित जिला अस्पताल तक पहुंचने में भी मरीजों के पसीने छूट रहे हैं।
जिला अस्पताल तक पहुंचने में यह तो उन्हें एनएच-24 के लंबे रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल का कहना है कि पुल का निर्माण धीमा हो रहा है। इस कारण हापुड़ के व्यापार बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं।
उद्यमी देवेंद्र शर्मा का कहना है कि निर्माणाधीन पुल पर पिछले एक महीने से काम करने वाली लेबर की संख्या बहुत कम रह गई है तथा पुल के निर्माण में काम आने वाले उपकरणों की संख्या भी कम हुई है।
लकड़ी व्यवसायी संजय गर्ग का कहना है कि पुल निर्माण के कारण वैकल्पिक रास्तों श्यामपुर ददायरा रोड व चैनापुरी मार्ग आज तक पूर्ण रूप से ठीक नहीं कराया गया।
व्यापार मंडल के जिला महामंत्री टुक्की राम गर्ग ने कहा कि पुल निर्माण में देरी से जनता के साथ व्यापारी का बड़ा नुकसान हो रहा है।
राज्य सेतू निगम के परियोजना निदेशक अजय सिंह का कहना है कि इस पुल का निर्माण मार्च 2017 तक होना प्रस्तावित है। कुछ कारणों से सेतु निर्माण में विलंब हुआ था, लेकिन अब तेज गति से इसका निर्माण शुरू कर दिया गया है।