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नाबालिगों ने खाया जहर लड़की की जान गई

Sun, 13 Dec 2015 01:43 AM IST
अमर उजाला, गढ़मुक्तेश्वर
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दो परिवार वालोें की नामसमझी के कारण नाबालिग लड़की की जान चली गई, जबकि एक किशोर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। बहादुरगढ़ क्षेत्र के एक गांव के दो नाबालिगों में प्रेम-प्रसंग हो गया।
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दोनों साथ पकड़े जाने पर परिजनों ने पीटा। शुक्रवार रात किशोरी ने जहर खाकर जान दे दी। सुबह लड़की जनाजा उठने के बाद लड़के ने भी जहर खा लिया। लड़के को बुलंदशहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

बहादुरगढ़ क्षेत्र के एक गांव में एक ही समुदाय के किशोर (16) और किशोरी (14) के बीच काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जिसकी भनक लगते ही दोनों के परिजन भड़क गए और बच्चों के घर से बाहर निकलने पर पहरा लगा दिया।
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बताया गया कि इस बंदिश से प्रेमी युगल मानसिक तौर पर परेशान थे। पंचायत चुनाव की वोटिंग के दौरान जब परिजन वोट डालने गए हुए थे। दोनों नाबालिगों को मिलने का मौका मिल गया।

इसी समय किशोरी के परिजन घर लौट आए। उन्होंने घर आए किशोर को दबोचकर बुरी तरह पीटा और किशोरी को भी प्रताड़ित किया। बताया गया कि शुक्रवार रात किशोरी ने घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया।

लड़की को उल्टियां होने पर घर वालों को पता चला। उन्होंने किशोरी को बुलंदशहर के बुगरासी में निजी डाक्टर को दिखाया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

प्रेमी ने भी की जान देने की कोशिश
प्रेमिका की मौत की सूचना मिलते ही आहत किशोर ने उसका जनाजा होने के बाद जहरीला पदार्थ खा लिया। तबियत बिगड़ने पर वह चक्कर खाकर गिर पड़ा।

परिजन उसे इलाज के लिए बुलंदशहर के कस्बा बुगरासी ले गए। किशोर की हालत गंभीर है। उसे आईसीयू भर्ती कराया गया है।

बच्चों की एक्टिविटी पर रखें नजर
समाजशास्त्री डॉ. सूर्यप्रभा का कहना है कि फिल्मों और टीवी सीरियलों का दुष्प्रभाव बच्चों पर अधिक पड़ता है। वे फिल्म के कैरेक्टरों को अपने ऊपर उतारने लगते हैं।

किशोरावस्था के दौरान बच्चों की हर एक्टिविटी पर निगाह रखने की जरूरत हैं। उनसे ज्यादा से ज्यादा बात करे। कहीं ऐसा तो नहीं है कि वे परिवार से कट रहे हों।

बच्चों को समझाएं
मनोचिकित्सक डॉ. विपुल त्यागी का कहना है कि कम उम्र में प्रेम-प्रसंग के मामले में बच्चों को समझाने की जरूरत है। मैच्योरिटी न होने के कारण बच्चे इस उम्र में अपना भला-बुरा नहीं समझ पाते हैं।

इसलिए ऐसे मामले सामने आने पर परिजनों को बेहद संयम और सावधानी के साथ कदम उठाने चाहिए। उनकी सख्ती बच्चों को उनके खिलाफ कर सकती है। ऐसे में वे कोई भी कदम उठा सकते हैं।
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