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4 को कैंसर, 70 फीसदी हेपेटाइटिस बी सी से पीड़ित

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धौलाना मसूरी-गुलावठी मार्ग स्थित यूपीएसआईडीसी एरिया में संचालित फैक्ट्रियों से निकलने वाला अपशिष्ट पदार्थ (वेस्ट) आसपास के गांवों के लिए जानलेवा बन चुका है। फैक्ट्रियों के केमिकल युक्त पानी से भूजल बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है।
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उदयरामपुर नंगला गांव के 70 फीसदी ग्रामीण कैंसर, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। वर्तमान में गांव में चार लोग कैंसर से पीड़ित हैं और पिछले दो साल में छह लोग कैंसर के कारण दम तोड़ चुके हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की अनदेखी के चलते क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं।


उदयरामपुर नंगला गांव में हालात ये है कि ग्रामीण अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। जल प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि गांव के सरकारी हैंडपंप भी रंगीन पानी उगल रहे हैं। दूषित पानी पीने से उदयरामपुर नंगला के हर घर में बीमार लोग हैं।
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पिछले दो साल में कैंसर से राज सिंह मास्टर, दाताराम, रामपत, धर्मपाल,दीपू और जाली सिंह की मौत हो चुक है। उनके परिजन भी कैंसर के लिए खराब पानी को ही दोषी मान रहे हैं।

 गांव में 70 फीसदी लोग हेपेटाइटिस बी और सी, पेज की गंभीर बीमारियों से जूझ रहें हैं। यही नहीं सतीश, उसकी पत्नी मंजू, बेटा तनीष, बेटी राधिका, कोका कोला कंपनी में कार्यरत उसका भाई धीरज सिंह, अन्य ग्रामीण कर्मचारी सुशील कुमार, उसकी पत्नी शारदा देवी, बलवीर सिंह की पत्नी शीला, अमर पाल महाशय, चौधरी सीपी सिंह, संजीव मिश्रा, राहुल नागर, सतीश, राजेंद्र, गुल्ली हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं।

 युवा ग्रामीण सचिन नागर बताते हैं कि गांव की ओर स्वास्थ्य विभाग ने कभी ध्यान नहीं दिया। आज तक हेल्थ कैंप भी नहीं लगाया गया। गांव का पानी पीने योग्य नहीं है और फसलें औद्योगिक इकाईयां से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी के कारण तबाह हो जाती हैं। कई बार ग्रामीणों ने समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है, लेकिन प्रशासन ने नहीं सुना।
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