थाना बाबूगढ़ पुलिस व स्वॉट की संयुक्त टीम ने वाहन चेकिंग के दौरान तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान बदमाशों ने जरौठी रोड पर सात मई को लकड़ी आढ़ती की लूट के बाद हत्या के अलावा लाखों रुपये की लूट की घटनाएं करना कबूला है।
इसके अलावा बदमाशों ने कुचेसर रोड चौपला पर फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों से भी लूट की थी। बड़ी बात है कि पकड़े गए सभी आरोपी ग्रेजुएट हैं। पुलिस ने उनके पास से दो तमंचे, कारतूस, दो बाइक व लूट की कुछ रकम बरामद की है।
पुलिस अधीक्षक हेमंत कुटियाल अपने कार्यालय पर पत्रकार वार्ता में कहा कि थाना देहात व स्वॉट की संयुक्त टीम हाईवे पर अल्लीपुर कट के पास वाहन चेकिंग कर रही थी। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि बाइक पर तीन बदमाश कुचेसर की ओर से आ रहे हैं।
सूचना के आधार पर बाइक पर तीन बदमाश आते दिखाई दिये। जिन्हें पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार बदमाशों के नाम संदीप सैन पुत्र ईश्वर सैनी निवासी रमपुरा,
शुभम सैन पुत्र सुरेंद्र कुमार सैन निवासी मोहल्ला साकेत थाना पिलखुवा व उपेंद्र पुत्र गोविन्द स्वरूप निवासी ढकरौली थाना खानपुर जिला बुलंदशहर है।
पूछताछ में बदमाशों ने सात मई को जरौठी रोड पर लकड़ी के आढ़ती रामबीर चौधरी के साथ लूटपाट व हत्या की घटना कुबूल की। इस घटना में शुभम सैन व उपेंद्र शामिल थे। हालांकि इन्होंने कहा कि उनकी मंशा रामबीर को मारने की नहीं थी। जल्दबाजी में गोली चलने से उसकी मौत हो गयी।
इनके कब्जे से दो तमंचे, कारतूस व दो चोरी की बाइक व लूट के 13,350 रुपये भी बरामद किये है। इस गिरोह में आठ सदस्य हैं। गिरोह का सरगना आनंद उर्फ आदित्य व प्रदीप नाई उत्तराखंड के काशीपुर में फाइनेंस कंपनी कर्मचारियों से लूटपाट करने के मामले में गिरफ्तार किये जा चुके हैं।
जिसके बाद ही घटना का खुलासा हुआ। गिरोह का एक सदस्य गौरव पुत्र ओमबीर निवासी गांव लाडपुर बुलंदशहर फिलहाल फरार है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार तीनों बदमाशों ने 23 मार्च को कुचेसर चौपला पर फाइनेंस कंपनी कर्मचारियों से 2.61 लाख,
24 मार्च को सोनीपत के ककरोली रोड स्थित एक फाइनेंस कंपनी से 10 लाख, 12 दिसंबर 2016 में निजामपुर बाइक लूट, 13 मई 2017 को पिलखुवा के छिजारसी सें बाइक लूट, 23 फरवरी 2017 को बहादुरगढ़ गैस एजेंसी से 1.47 लाख की लूट की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है।
गिरोह में शामिल सभी बदमाश ग्रेजुएट हैं। इनमें से कुछ ने बीबीए व बीसीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स भी कर रखे हैं। लेकिन जॉब न मिलने पर अधिकतर ने फाइनेंस कंपनियों में कार्य किया। जिसके बाद मिलकर गैंग बनाया। इनकी नजर फाइसेंस कंपनियों पर ही रहती थी।
गैंग को सूचना मिली थी कि लकड़ी के आढ़ती रामबीर चौधरी के पास 25 लाख रुपये आने हैं। इसी सूचना के आधार पर पहले बदमाशों ने उसकी दुकान पर धावा बोला लेकिन सूचना फर्जी निकली।