नोटबंदी के 38 दिन बाद भी बैंकों और एटीएम में कैश किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लोग सुबह से बैंको और एटीएम के बाहर लाइन में लगकर कैश निकालने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोगों को कैश मिल रहा है जो कुछ निराश होकर लौट रहे है।
बृहस्पतिवार को कैश नहीं मिलने पर कई स्थानों पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने प्रदर्शन कर जमकर हंगामा किया। वहीं लोगों ने बैंक कर्मियों पर सिर्फ अपने खास लोगों को कैश देने का भी आरोप लगाया है।
बृहस्पतिवार सुबह बाबूगढ़ के कुचेसर रोड चौपला स्थित भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम में करीब 20 लोगों द्वारा कैश निकालने के बाद कैश खत्म हो गया। जिसके बाद सुबह से लाइन में लगे लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान राजू शर्मा, इमरान, देवेंद्र,
डा. परविंदर, सचिन कुमार, ललित कुमार, मुकेश कुमार मौजूद रहे। इस संबंध में बैंक प्रबंधक बीर सिंह ने बताया कि चेस्ट से ही कम कैश मिला था। इसलिए लोगों को इस स्थिति का सामना करना पड़ा।
वहीं, गढ़ में बृहस्पतिवार को बैंक ऑफ बड़ौदा, सिंडिकेट बैंक झड़ीना और सेंट्रल बैंक अठसैनी समेत कई शाखाओं में कैश नहीं पहुंच पाया। साथ ही क्षेत्र के अधिकांश बैंकों की शाखाओं में सुबह 12 बजे से पहले ही कैश समाप्त हो गया।
जबकि, सिंडिकेट बैंक शाखा झड़ीना समेत कई शाखाओं में तीसरे दिन भी कनेक्टिविटी ठप होने से पैसा नहीं बंट सका। कई घंटों तक लाइन में खड़े होने के बाद भी कैश नहीं मिलने से झड़ीना और बहादुरगढ़ के लोगों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने किसी तरह लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया।
बहादुरगढ़ पीएनबी के मैनेजर एसके दीक्षित ने लोगों द्वारा लेटलतीफी के आरोप को बेबुनियाद बताया। उधर, पिलखुवा में रेलवे रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर सुबह से ही लोग कैश निकालने के लिए कतार में लगे हुए थे। 11 बजे कैश खत्म होने पर लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।
लोगों ने बताया कि शाखा प्रबंधक अपने खास लोगों को कैश बांटते हैं। रोज थोड़ी देर में ही कैश खत्म हो जाता है। वहीं, शाखा प्रबंधक ने कहा कि जितना कैश बैंक में आता है, वह लोगों को बांट दिया जाता है। किसी भी ग्राहक के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।