कहीं फिर से तबाही न मचा दे खादर की मस्ती
गढ़मुक्तेश्वर। यूपी समेत उत्तराखंड और असम में कच्ची शराब की लत ने फरवरी माह में सैकड़ों लोगों को मौत की नींद सुलाने के साथ ही सैकड़ों की आंखों की रोशनी छीन ली है, लेकिन इसके बाद भी गंगा खादर से जुड़े अधिकांश गांवों में कच्ची शराब तैयार करने का गोरखधंधा कुटीर उद्योग के रूप में अपनी जड़ जमाए हुए है। होली का पर्व बीतने के बाद लोकसभा चुनाव की बारी आनी है, जिसके चलते कच्ची माफिया दिन-रात कच्ची शराब बनाकर उसका स्टॉक करने में जुटे हैं।
जंगल में लहलहा रहीं फसलों से लेकर गांवों की आबादी के बीच भी कच्ची शराब तैयार की जा रही है, जिसे खादर की मस्ती के रूप में खास पहचान हासिल है। कच्ची शराब के माफिया अब आकर्षक पैकिंग के माध्यम से भी आसपास के जनपदों समेत विभिन्न स्थानों पर सप्लाई करने का धंधा भी कर रहे हैं। जिससे युवा वर्ग में बड़ी तेजी के साथ नशे की लत पनप रही है। कम पैसों में कच्ची शराब उपलब्ध होने से गरीब मजदूर तबका इसकी लत में सर्वाधिक फंसा हुआ है। होली का पर्व नजदीक आ रहा है वहीं लोकसभा चुनाव की आचार संहिता भी इसी माह लगने के आसार हैं। इस सुनहरे मौके का लाभ उठाने को कच्ची शराब तैयार कर उसका स्टॉक करने में काफी तेजी आ चुकी है।
रंग में भंग डालकर मचाई थी तबाही
16 मार्च 2009 में होली के ऐन मौके पर थिनर से तैयार की गई कच्ची शराब ने बहादुरगढ़ के गांव कनौर में सात लोगों की जिंदगी को निगल लिया था, जिसके दो दिन बाद विषाक्त शराब से मौत होने का सिलसिला क्षेत्र के नानपुर, शरीकपुर, डिबाई, खुड़लिया, देवली, ढाना समेत कई गांवों तक पहुंच गया था। जिससे गढ़ क्षेत्र में महज एक दिन के भीतर 32 लोगों की मौत की नींद सुला दिया था।
भौगोलिक स्थिति भी शराब माफियाओं के लिए मुफीद
खादर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने के गोरखधंधे में जुटे माफियाओं के लिए यहां की विषम भौगोलिक स्थिति भी बेहद मददगार साबित होती है, क्योंकि उन तक पहुंचने के लिए जहां अपेक्षित सड़क और आवागमन से साधन मुहैया नहीं हैं। वहीं दबिश पड़ने के दौरान कच्ची शराब के गोरखधंधे से जुड़े लोग गंगा नदी को पार कर बड़ी आसानी के साथ दूसरे किनारे से जुड़े जनपद अमरोहा में भाग जाते हैं।
ऐसे तैयार होती है कच्ची शराब।
गन्ने का रस, गुड़, शीरा अथवा चीनी को पानी में मिलाकर ड्रम में भर दिया जाता है, जिसके खमीरे को पांचवें दिन हल्की आंच जलाकर उसके ऊपर रख दिया जाता है। ड्रम से उड़ने वाली भाप को पाइप के द्वारा बर्तन में एकत्र किया जाता है, जिसमें पानी मिलाकर शराब तैयार हो जाती है।
स्वास्थ्य के लिए घातक है कच्ची शराब
डॉ. पीके शुक्ला का कहना है कि कच्ची शराब में नशे की तीव्रता बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद समेत कास्टिक सोडा, नौशादर और पोटाश जैसे अखाद्य पदार्थों की बड़े स्तर पर मिलावट की जाती है, जो चिकित्सीय दृष्टि से इंसानी सेहत समेत पेट आंत और लीवर के लिए बेहद घातक माने जाते हैं।
सीओ अशोक शुक्ल का कहना है कि कच्ची शराब की धरपकड़ के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत दो माह में तीन दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से सैकड़ों लीटर शराब समेत बड़ी मात्रा में लहन बरामद कर उसे नष्ट किया गया है। अब होली और चुनाव के मद्देनजर बड़े स्तर पर धरपकड़ अभियान चलाया जाएगा।