संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के गांव मीरापुर गढ़ी में करीब साढ़े तीन वर्ष पहले आरोपी द्वारा एक युवक पर चाकू से प्रहार कर निर्मम हत्या करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश ने मामले के आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नरेश चंद शर्मा ने बताया कि गांव मीरापुर गढ़ी निवासी रतनलाल ने पिलखुवा कोतवाली में तहरीर दी थी। जिसमें उसने कहा कि 16 जून 2020 की शाम सात बजे उसके पुत्र सचिन व गांव के ही मनोज उर्फ सद्दाम पुत्र पूप्प के बीच झगड़ा हो गया। जिसमें मनोज ने उनके पुत्र के सीने में चाकू से वार कर दिया। जिससे वह गंभीर रुप से घायल हो गए। घायल को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में लेकर गए। जहां पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने आरोपी मनोज के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कोर्ट में चल रही थी। उनके द्वारा न्यायालय में मजबूत पैरवी की गई है। जिसके चलते उनके द्वारा अभियोजन पक्ष की तरफ से कई गवाह न्यायालय में पेश किए गए। जिसमें पुलिस विभाग की तरफ से मामले में पैरवी कर रहे पैरोकार देवेंद्र कुमार द्वारा मात्र डेढ़ माह में 14 गवाह न्यायालय में पेश किए गए। साथ ही आरोपी के खिलाफ कई बड़े साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किए।
-न्यायाधीश का निर्णय-
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विपिन कुमार द्वितीय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बृहस्पतिवार को मामले में निर्णय सुनाया। न्यायाधीश विपिन कुमार प्रथम ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत मेरे द्वारा मामले के समस्त तथ्य व परिस्थितयों पर विचार किया गया। यह प्रकरण काफी गंभीर है। अभियुक्त मनोज द्वारा सचिन के सीने में चाकू से प्रहार कर उसकी निर्मम हत्या की गई है। इसलिए अभियुक्त मनोज को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा के दंडादेश से दंडित किया जाता है। कोर्ट ने आरोपी नहीं दी थी जमानत-
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नरेश चंद शर्मा ने बताया कि युवक की निर्मम हत्या करने के मामले को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। जिसके चलते ही कोर्ट ने आरोपी को मामले की पूरी सुनवाई के दौरान जमानत भी नहीं दी। जिससे आरोपी मामले की करीब साढ़े तीन वर्ष की सुनवाई के दौरान जेल में ही बंद रहा है।