हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट कोर्ट ने शुक्रवार ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। जिसमें दो गैंगस्टर भाइयों की माता ने कोर्ट में दोनों पुत्रों के नाम कोई संपत्ति न होने का दावा करते हुए पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई मकान की कुर्की को अवैध बताया था। लेकिन मां अपनी आय का कोई स्रोत कोर्ट में साबित नहीं कर सकी। जिस पर न्यायाधीश ने पुलिस और जिला प्रशासन को संपत्ति पर कब्जा बरकरार रखने का फैसला सुनाया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि नफीस व उसका भाई सद्दाम पुत्र इस्लाम उर्फ इस्लामुद्दीन निवासी गांव पिपलेहडा थाना धौलाना पर विभिन्न थानों में कई संगीन अपराध के मुकदमे दर्ज होने के साथ ही गैंगस्टर के मामले दर्ज हैं। जिलाधिकारी द्वारा 24 अगस्त 2022 को किए गए आदेश पर पुलिस-प्रशासन ने 30 अगस्त 2022 गिरोहबंद व समाज विरोधी क्रियाकलापों में लिप्त नफीस व सद्दाम का करीब 25 लाख रुपये की कीमत का मकान कुर्क किया था। जिसके बाद डीएम ने ममाले की पत्रावली न्यायालय में प्रस्तुत की। जिसमें अभियुक्त नफीस व सद्दाम की माता फूलमिर्जा ने न्यायालय में 8 सिंतबर को आपत्ति दर्ज की। जिसमें उसने कहा कि उक्त मकान से उनके दोनों पुत्र नफीस व सद्दाम का कोई सरोकार नहीं है। यह मकान उनके द्वारा स्त्रीधन विक्रय कर खरीदा गया है। इसलिए पुलिस-प्रशासन द्वारा बिन किसी जानकारी के उन्हें मकान से बाहर करके मकान को सील करना अवैध है।
प्रशासन की तरफ से पैरवी करते हुए उन्होंने कोर्ट को बताया कि फूलमिर्जा अपने स्त्रीधन जिसमें गहने आदि के विक्रय का कोई साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं किया है। साथ वह न्यायालय में अपनी आय का कोई स्रोत साबित करने में भी नाकाम रही है। वहीं नफीस व सद्दाम का आपराधिक इतिहास से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा चोरी व नशीले पदार्थ संबंधी गंभीर अपराध किए गए हैं। जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रश्रगत मकान का निर्माण उनके द्वारा अवैध आय के स्रोत से किया गया है।
न्यायाधीश कमलेश कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि प्रश्नगत मकान का निर्माण अभियुक्त नफीस व सद्दाम द्वारा अपराध कर अर्जित किए गए अवैध धन से किया जाना परिलक्षित होता है। इसलिए डीएम के कुर्की के आदेश विधि अनुरुप है। डीएम द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर आदेश पारित किया गया है। उसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप किए जाने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए डीएम द्वारा पारित कुर्की आदेश पुष्ट किए जाने योग्य है। जिस पर कुर्क संपत्ति पर जिला प्रशासन का कब्जा बरकरार रखने का आदेश किया जाता है।
प्रदेश का दूसरा मामला-
गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत अपराधियों की संपत्ति की कुर्की होती है। लेकिन ट्रायल पर कोर्ट संपत्ति को वापस कर देती है। यह प्रदेश का दूसरा मामला है। जिसमें पुलिस और जिला प्रशासन की सतर्कता और कोर्ट में पेश सबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार ने डीएम द्वारा कराई गई कुर्की को सही ठहराया और जिला प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया है। इस प्रकार का प्रथम फैसला कुछ दिन पहले बुलंदशहर की कोर्ट ने सुनाया था।