हर माह लाखों की रकम खर्च होने के बावजूद ब्रजघाट गंगा में डूबने से मौत की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं हैं। ज्येष्ठ दशहरा से लेकर अब तक 16 दिनों में आठ लोगों की मौत होने से पालिका के इंतजामों और प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है।
लाखों की रकम और अमला लगा होने के बावजूद सुरक्षा इंतजाम राम भरोसे हैं। ब्रजघाट गंगा में हर साल डूबने से होने वाली मौत का आंकड़ा कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है। डूबने से होने वाली मौतों को लेकर प्रदेश शासन ने कड़ी नाराजगी जताई थी।
तीन मई को एडीएम रजनीश राय और एएसपी आरएन यादव ने गंगा किनारे बैरिकेडिंग को और भी चाक चौबंद करने के साथ ही डूबने वालों को बचाने के लिए पालिका स्तर से ठोस व्यवस्था करने की हिदायत दी थी।
वहीं, डूबने वालों को बचाने के लिए पुख्ता बंदोबस्त करने के पालिका प्रशासन और ठेकेदार को कड़ी हिदायत भी दी थी। इसके बावजूद पालिका प्रशासन के इंतजामों में कई पोल खुलकर सामने आ रही हैं।
रविवार को उत्तराखंड के रहने वाले केमिस्ट गौरव तेज बहाव के साथ गंगा में डूब गया। तीर्थ पुरोहित पंडित राजकुमार लालू और कैलाश शर्मा और मानें तो वह चीखते चिल्लाते रहे, परंतु इस दौरान गंगा किनारे से पालिका के गोताखोर पूरी तरह नदारद थे। जब तक मल्लाह नाव से पहुंचे तक तक मौत हो चुकी थी।
व्यापारी नेता मूलचंद सिंघल का कहना है कि हर वर्ष बैरिकेडिंग समेत नाव और गोताखोरों पर 50 लाख से अधिक की राशि खर्च हो रही है, परंतु इसके बाद भी गंगा में डूबकर होने वाली मौत का सिलसिला कम होने की जगह बढ़ रहा है।
घटनाओं के दौरान गोताखोरों का गायब होना पालिका प्रशासन और ठेकेदारों की लापरवाही का नतीजा है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
एसडीएम शमशाद हुसैन का कहना है कि पालिका के गोताखोरों की लापरवाही बरतने के आरोप की जांच कराई जाएगी। सच्चाई सामने आने पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।