हापुड़। शीतगृह एसोसिएशन की ओर से तय किया गया भंडारण शुल्क अभी प्रभावी नहीं होगा। डीएम की अध्यक्षता में आयोजित बैठक बेनतीजा रही। किसानों ने बढ़े दामों का विरोध किया। वहीं, शीतगृह संचालकों ने महंगाई बढ़ने का तर्क रखा। आस-पास के जिलों में जितना भंडारण शुल्क घोषित होगा, उसी के अनुसार यहां भी रखा जाएगा। इस संबंध में जल्द ही आगामी बैठक होगी।
जिले में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है। इस बार आलू की फसल कमजोर है, उत्पादन भी कम है। मंडी में किसानों को 650 से 750 रुपये प्रति कट्टा आलू के दाम मिल रहे हैं। ऐसे में शीतगृहों में आलू कम ही पहुंच रहा है। आलम यह है कि अभी तक करीब 40 फीसदी भंडारण हो सका है।
शीतगृह संचालकों का मानना है कि इस बार स्टोर पूरे नहीं भरेंगे, 80 से 85 फीसदी भंडारण होने की उम्मीद है। क्योंकि किसान बाजार में ही आलू की बिक्री कर रहे हैं। हाल ही में जिला मुख्यालय सभागार में डीएम की अध्यक्षता में किसान, शीतगृह संचालक और विभागीय अधिकारियों की बैठक हुई।
इसमें किसानों ने बढ़े शुल्क का विरोध किया। बता दें कि शीतगृह एसोसिएशन ने सामान्य आलू का भंडारण शुल्क 270 रुपये प्रति क्विंटल और शुगर फ्री आलू का भंडारण शुल्क 300 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। सामान्य आलू का शुल्क पांच रुपये और शुगर फ्री आलू का भंडारण शुल्क 15 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है।
जिले में शीतगृहों और आलू की स्थिति
शीतगृहों की संख्या18
स्टोरेज क्षमता1.80 लाख मीट्रिक टन
जिले में औसत उत्पादन-1.90 लाख मीट्रिक टन
शीतगृह एसोसिएशन द्वारा तय किया गया शुल्क
आलू वर्तमान दाम पहले दाम
सामान्य आलू 270 रुपये 265 रुपये
शुगर फी 300 रुपये 285 रुपये
(नोट : किराया रुपये/क्विंटल में है, जो शीतगृह एसोसिएशन ने तय किया है। लेकिन इस शुल्क को अभी अनुमति नहीं दी गई है।)
कोट -
आलू के भंडारण शुल्क को लेकर निर्णय नहीं हो सका है। आस पास के जिलों में जो शुल्क तय होगा, उसी के अनुसार यहां भी भंडारण शुल्क रखा जाएगा। इसे लेकर जल्द ही फिर से बैठक होगी। - डॉ.हरित कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।