जसरूपनगर गांव के लोगों द्वारा मतदान के बहिष्कार का एलान किए जाने के मामले में बुधवार को सीआईडी और एलआईयू की टीम ने गांव का दौरा किया। लोगों से मतदान न करने का निर्णय लिए जाने के कारण को जाना।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि कोई राजनेता व प्रशासनिक अधिकारी उनकी समस्या पर गंभीर नहीं है, दस साल से वह नराकीय जीवन जी रहे हैं। इसलिए वह चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।
बता दें कि दस्तोई रोड स्थित जसरूपनगर गांव में लोग सालों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव के करीब 150 घरों के बाहर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकला केमिकलयुक्त पानी भरा रहता है।
गांव का मुख्य मार्ग कीचड़ में तबदील है, ऐसे में लोगों को आवागमन में भी बेहद परेशानी होती है। गांव के कई लोग कैंसर की चपेट में आकर काल की गाल में भी समा चुके हैं, वहीं, कई लोग मौत से जूझ रहे हैं।
मंगलवार को ग्रामीणों ने मतदान न करने का एलान कर सभी को हैरात में डाल दिया था। बुधवार को सीआईडी व एलआईयू की टीम ने गांव का दौरा कर, ग्रामीणों की समस्याओं को जाना। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि सरकारी योजनाओं को उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता है।
यहां तक की शौचालय योजना के लाभ से भी वह वंचित हैं। घरों के बाहर केमिकल का पानी एकत्र हो रहा है, इससे अनेक बीमारियां फैल रही हैं। इसके बाद टीम ने ग्राम प्रधान के आवास पर जाकर भी ग्रामीणों की समस्या के बारे में वार्ता की।
पीड़ित ग्रामीणों ने बुधवार को भी स्पष्ट कहा कि वह मतदान नहीं करेंगे और न ही किसी राजनेता को गांव में वोट मांगने आने देंगे।