आरटीओ आफिसों में दलालों के बिना काम कराना आसान नहीं है। अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत ने दलालों का धंधा मंदा नहीं पड़ रहा। दलाल लोगों से कई गुना रुपया वसूलते हैं, जिसका आफिस तक में बंदरबांट किया जाता है।
अब ड्राइविंग लाइसेंस की फीस में बढ़ोतरी के बाद से दलालों की वसूली और ज्यादा हो गई है। दलाल जहां पहले जहां डीएल बनवाने के लिए एक हजार रुपये लेते थे, वहीं अब फीस से अलग तीन हजार रुपये तक ले रहे हैं। परिवहन विभाग के अफसर इस ओर मूकदर्शक बने हैं।
चार जनवरी को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने राजस्व बढ़ाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की फीस में वृद्धि कर दी थी। पहले लर्निंग डीएल के लिए जहां 20 रुपये प्रति वाहन फीस निर्धारित थी। वहीं इसे बढ़ाकर 100 रुपये प्रति वाहन कर दिया गया था।
इसके अलावा परमानेंट डीएल के लिए निर्धारित 300 रुपये की फीस बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया था। पहले हापुड़ आरटीओ कार्यालय में जहां रोजाना लगभग 200-250 डीएल बनते थे, वहीं फीस वृद्धि के बाद अब इनकी संख्या घटकर करीब 100 रह गई है।
अधिकारियों का कहना है कि लर्निंग में पांच गुना और परमानेंट में करीब चार गुना फीस बढ़ने से लाइसेंस की संख्या में कमी आई है। इतना ही नहीं आरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों ने भी चांदी काटनी शुरू कर दी है।
पहले एक डीएल बनवाने के लिए दलाल सिर्फ एक हजार रुपये लेेते थे, अब दलालों ने फीस के अतिरिक्त एक डीएल पर तीन हजार रुपये ऐंठने शुरू कर दिए हैं। आरटीओ कार्यालय में अव्यवस्था के चलते लोग दलालों को अधिक पैसा देकर अपना कार्य कराने को मजबूर हैं।
एक दलाल ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरटीओ कार्यालय में तैनात कुछ कर्मचारियों के कहने पर यह फीस निर्धारित की है। अब सभी दलाल एक समान फीस लेंगे। इसमें से आफिस का भी हिस्सा निकालना पड़ता है।
एआरटीओ प्रशासन एसके सिंह ने बताया कि दलालों का आफिस में प्रवेश पहले ही वर्जित है। डीएल बनवाने के इच्छुक लोग सीधे संपर्क कर, निर्धारित शुल्क जमा कर अपना डीएल बनवा सकते हैं। दलालों के चक्कर में न पड़ें।