हापुड़। हापुड़ गन्ना समिति में सात करोड़ के घोटाले में मामले में समिति के चेयरमैन ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति समेत डीसीओ पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। तीन करोड़ की एफडी अधिकारियों की लापरवाही से नहीं हुई, जिस कारण यह भी गबन की भेंट चढ़ गए। चेयरमैन ने डीएम से शिकायत कर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
डीएम कार्यालय पहुंचे समिति के चेयरमैन कुणाल चौधरी ने बताया कि मेरे सभापति बनने के बाद जब समिति के बचत संबंधी जानकारी मांगी तो उन्हें सिर्फ सात करोड़ की एफडीआर की जानकारी दी गई, समिति में उपलब्ध पांच करोड़ रुपये की कोई जानकारी नहीं दी गई।
वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में भी उन्हें सिर्फ 30 लाख रुपये की बचत होने की जानकारी देकर गुमराह कर दिया। जबकि वर्ष 2022 से बैंक खातों के स्टेटमेंट का मिलान वाउचर व जर्नलबुक से करने पर पाया गया कि कुल 117 वाउचर पत्रावली में नहीं हैं, जिनकी धनराशि सात करोड़ के लगभग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि समिति द्वारा एक पत्र जिला गन्ना अधिकारी हापुड़ को उपलब्ध कराया गया, जिसके द्वारा समिति में उपलब्ध बचत धनराशि में से तीन करोड़ रुपये एफडीआर बनवाने की अनुमति चाही गई, लेकिन डीसीओ द्वारा इसकी अनुमति आजतक समिति को नहीं दी गई। यदि एफडीआर बनवाने की अनुति दी जाती तो संभवत यह गबन ना होता। जिस कारण डीसीओ की भूमिका भी संदिग्ध है।
उन्होंने आरोप लगाया कि डीसीओ द्वारा समिति निरीक्षण को नोटिस जारी किया गया तथा बाद में उसे निरस्त किया गया। एक मई को जांच दल गठित किया गया, लेकिन पांच मई से प्रकरण की जांच प्रारंभ की गई। डीएम को पत्र सौंपकर उन्होंने डीसीओ, समिति सचिव, लेखाकार, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, आईडीबीआई बैंक प्रबंधक और स्टॉफ से गबन की राशि वसूल कराने की मांग की है।
डिप्टी केन कमिश्नर को लिखी थी चिट्ठी
गन्ना समिति की ओर से तीन करोड़ की एफडीआर संबंधी चिट्ठी तत्काल ही डिप्टी केन कमिश्नर को लिखी थी। एफडी कराने में तीन महीने की देरी पर छह लाख का नुकसान हुआ, इस संबंध में भी जवाब मांगा गया था। मेरा इस मामले में कोई लेना देना नहीं है, समिति के सचिव का नंबर तक खातों में नहीं लगा था। निरीक्षण समय से कर, आख्या भी दी गई। पूरा प्रकरण समिति से जुड़ा है, गन्ना विभाग पर गलत आरोप लग रहे हैं। - सना आफरीन खान, जिला गन्ना अधिकारी।