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Hapur News: शाखा प्रबंधक और क्षेत्राधिकारी को न्यायिक हिरासत में भेजा जेल

Wed, 07 Feb 2024 10:59 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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गढ़मुक्तेश्वर। ऋण उपलब्ध कराने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के शाखा प्रबंधक गौरव गुप्ता और एक अन्य व्यक्ति प्रमोद को सीबीआई ने अदालत में पेश किया। बुधवार को अदालत ने दोनों आरोपियों को 20 फरवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सीबीआई ने शाखा प्रबंधक के पैतृक आवास मेरठ व हापुड़ में भी तलाशी ली थी।
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मंगलवार की दोपहर करीब तीन बजे बैंक शाखा में घुसे गाजियाबाद से आई सीबीआई की टीम के सदस्य बुधवार तड़के करीब तीन बजे ही बाहर निकले। इस दौरान बैंक में ही उन्होंने शाखा प्रबंधक गौरव गुप्ता और ऋण दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले फील्ड ऑफिसर प्रमोद कुमार से बारी-बारी पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने सभी बातों को अलग-अलग मोबाइलों में भी रिकार्ड किया। उसके बाद टीम उन्हें लेकर अपने साथ गाजियाबाद के लिए रवाना हो गई।

यह था मामला : नगर के मोहल्ला आदर्श नगर निवासी दीपक कुमार ने पीएमईजीपी योजना के तहत सिलाई मशीन खरीदने को दो लाख रुपये का ऋण लेने के लिए आवेदन किया था। जिसके लिए फील्ड ऑफिसर ने बैंक प्रबंधक के नाम पर 25 प्रतिशत रिश्वत देने की मांग की थी। दीपक ने ऐसा करने से मना किया, तो आरोपी दो लाख के बजाए चार लाख का ऋण देने के लिए तैयार हो गए। लेकिन दीपक एक लाख रुपये की रिश्वत देने के लिए तैयार नहीं हुआ और वह परेशान हो गया।
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दीपक ने बताया कि उसने दिवाली पर ऋण के लिए आवेदन किया था। चार दिसंबर को उसका ऋण स्वीकार हो गया। लेकिन एक लाख रुपये लिए बिना उसे ऋण नहीं दिया जा रहा था। उसने मानसिक तनाव में आकर गाजियाबाद सीबीआई के एक अधिकारी को फोन पर संपर्क किया। 30 जनवरी को आ गई थी टीम: दीपक ने बताया उसकी शिकायत के बाद सीबीआई की टीम उसके पास 30 जनवरी को आ गई थी। टीम के सदस्य निरंतर शाखा प्रबंधक और फील्ड आफिसर की निगरानी कर रहे थे।

इस दौरान सबूत एकत्र करने के लिए उसकी जेब में भी रिकॉर्डर रखवाकर रिकार्डिंग की गई थी।

जांच के दौरान तीन बार शाखा प्रबंधक ने मांगी माफी : बताया गया है कि दोपहर तीन बजे से लेकर अगले दिन तड़के तीन बजे तक पूछताछ के दौरान शाखा प्रबंधक ने सीबीआई की टीम से तीन बार रो-रो कर गलती होने की बात स्वीकार की और माफ करने की अपील की, लेकिन टीम ने उसकी नहीं सुनी।
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