जिले के तीनों विधानसभा के लिए 11 फरवरी को मतदान हो चुका है। 11 मार्च को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा, जिसके इंतजार में प्रत्याशी और उनके समर्थक बेताब हैं। समर्थक और प्रत्याशी रोज नए-नए एंगल से हार जीत का गणित लगा रहे हैं।
चुनाव बाद अब प्रत्याशियों के समर्थक रोज नए-नए एंगल से मतों का आकलन कर परिणाम निकालने का प्रयास कर रहे हैं कि कौन जीतेगा। इसके लिए कभी पार्टी तो कभी प्रत्याशी की छवि तो कभी अन्य समीकरण का आकलन किया जा रहा है।
कागजों पर किए जाने वाले इस आंकलन का परिणाम कैसिनों की डिस्क की तरह बार-बार बदलता रहता है। आकलन में प्रत्याशी जीताता दिखाई पड़ता है तो उसके समर्थक गली मोहल्ले में जाकर जीत के दावे ठोकने लगते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि बहुत से समर्थकों को तो मतगणना तक प्रत्याशी के यहां नाश्ते से लेकर डिनर तक की व्यवस्था बनाए रखनी है, इसलिए वह प्रत्याशी और
उसके परिवार के सामने सिर्फ यही कहते नजर आते हैं कि उन्होंने समूचे विधानसभा क्षेत्र से आंकड़े जुटा लिए हैं, जीत हमारी ही होनी है। यह बात अलग है कि मतगणना में उक्त प्रत्याशी का नंबर पीछे से खोजने पर मिले।