अगर आपको नगर के प्रमुख चौराहों से गुजरना है तो यहां आपको बसों चालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ सकता है। शहर में लगने वाले जाम में बस चालकों की सबसे बड़ी भूमिका है। इस समस्या को रोडवेज और डग्गामार बसों के चालक बढ़ावा देते हैं।
उक्त चालक चौपलो के बीचोंबीच सवारी बैठाना शान समझते हैं। कई बार इस जाम के बीच मारपीट की नौबत आ जाती है। नगर के मेरठ रोड पर रोडवेज बस स्टैंड है। जबकि दिल्ली रोड प्राइवेट बस स्टैंड है।
इसके बाद भी नगर के तहसील चौराहा, मेरठ तिराहा, बुलंदशहर रोड पर बसों की अराजकता का आलम रोज का है। बुधवार को भी मेरठ से बुलंदशहर जाने वाली बस इन स्थानों पर बस रोककर सवारी बैठाते व उतारते नजर आए।
जबकि दिल्ली व गढ़ के बीच चलने वाले वाहनों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही थी। रोडवेज बस चालक भी बस अड्डे के अलावा सड़कों पर सवारी उतारना व बैठाना अपनी शान समझने लगे हैं। जबकि डग्गामार बस चालकों का और बुरा हाल है।
इन चौराहों पर खड़े ट्रैफिक पुलिस कर्मी या थाना पुलिस आए दिन आटो और ई रिक्शा वालों को डंडा पटककर खदेड़ते हैं। बुधवार को चौराहों पर आड़े तिरछे वाहन खड़े होने से पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रही। सड़कों पर वाहन रेंगते रहे।
इतना ही नहीं तहसील चौराहे पर एक कार चालक की रोडवेज बस चालक से कहासुनी भी हो गई। हंगामा होने पर अन्य लोगों ने समझा बुझाकर मामला शांत किया। जबकि इस पूरे मामले से जिम्मेदार अधिकारी अंजान बने हुए हैं।
एसपी अलंकृता सिंह का कहना है कि जाम से निपटने के लिए पुलिस प्रयासरत है। चौराहों पर सवारी बैठने व उतारने पर चालान के रूप में कार्रवाई की जाती है। इसके बाद भी ऐसा हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
एआरएम एनपी सिंह का कहना है कि रोडवेज बस चालक व परिचालकों को स्टैंड पर सवारी उतारने के निर्देश दिए हुए हैं।