यह स्थिति बहादुरगढ़ पुलिस की गश्त व्यवस्था, सूचना तंत्र और सतर्कता की पोल खोलती है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते सक्रिय होती तो न केवल शव जल्दी बरामद होता, बल्कि अहम साक्ष्य भी सुरक्षित रहते।
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। महिला की पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीओ स्तुति सिंह का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब इतनी गंभीर घटना इतने दिनों तक दबे रह सकती है, तो आम नागरिक कितना सुरक्षित है।
क्षेत्र में चर्चा है कि यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अपराधियों के बढ़ते हौसलों का नतीजा है। लोगों ने मांग की है कि मामले का जल्द खुलासा किया जाए, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी दरिंदगी दोहराई न जा सके।