हापुड़। राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग में पंजीकृत ईंट-भट्टा संचालक टैक्स जमा करने में रूचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जिले के ईंट-भट्टा संचालक विभाग के अधिकारियों की रडार पर आ गए है। विभाग के अधिकारियों ने प्रतिवर्ष दो लाख रुपये से कम टैक्स देने वाले ईंट-भट्टों की जांच शुरू कर दी है।
राज्य वस्तु सेवा कर विभाग के उच्चाधिकारियों ने कुछ दिनों पहले ईंट-भट्ठों द्वारा जमा किए जा रहे कर-राजस्व के विश्लेषण के दौरान पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से कम कर जमा करने वाले केंद्र और राज्य क्षेत्राधिकार में पंजीकृत फर्मों की संख्या बढ़ रही है। इससे विभाग के राजस्व में गिरावट आई है।
राज्य कर विभाग के चार खंडों में करीब 135 ईंट-भट्टे पंजीकृत है। इनमें खंड तीन में सबसे अधिक 53 भट्टे पंजीकृत हैं। उच्चाधिकारियों का आदेश मिलने के बाद राज्यकर विभाग के अधिकारियों ने धौलाना क्षेत्र में पांच और गढ़मुक्तेश्वर में आठ ईंट-भट्ठों की जांच की। जांच के दौरान ईंटों के उत्पादन और स्टॉक का भी सर्वे किया जा रहा है। जिससे कारोबार का अनुमान लगाया जा सके।
एसजीएसटी ग्रेड एक के अपर आयुक्त मानवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले की सभी ईंट-भट्टों का सर्वे किया जा रहा है। दो लाख रुपये से कम टैक्स चुकाने वाले ईंट-भट्टों की जांच की जा रही है। अगर टैक्स चोरी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।