डेंगू और चिकनगुनिया को फैलाने वाला एडिस एजिप्टी मच्छर अब ज्यादा घातक होता दिख रहा है। तेज बुखार, सिर दर्द और जोड़ों में दर्द से ज्यादा खतरा ब्रेन अटैक का है। एक पखवाड़े में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जो ब्रेन अटैक से पीड़ित थे।
चिकित्सक डेंगू टाइप 3 और 4 को इसका कारण मान रहे हैं। जिले में खास सुविधा न होने के कारण ऐसे मरीजों को गाजियाबाद या मेरठ रेफर किया जा रहा है। यहां तक कि कई मरीज दम भी तोड़ चुके हैं।
डेंगू और चिकनगुनिया एडिस एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है।
इसके काटने से चार टाइप्स का वायरस सक्रिय होता है। अभी तक उत्तर भारत में टाइप 1 से लेकर 2 का वायरस मरीजों में देखा गया था। कुछ मरीजों के अंदर टाइप थ्री के वायरस का संक्रमण पाया गया। मेडिकल साइंस की नजर में टाइप 1 व 2 का वायरस जानलेवा नहीं है।
इसका इलाज संभव है। टाइप 3 के डेंगू वायरस में भी मरीज को काफी हद तक बचाया जा सकता है, लेकिन टाइप 4 वायरस बेहद जानलेवा है। यह ब्रेन सहित मल्टी आर्गन पर अटैक करता है। 15 दिन में अस्पतालों में 20 से ज्यादा ऐसे मरीज भर्ती हुए हैं,
जिन्हें न्यूरो प्राब्ल चलते भर्ती कराना पड़ा है। जांच के दौरान पाया गया कि उन्हें ब्रेन अटैक हुआ है। जिले में ब्रेन संबंधी इलाज की सुविधा नहीं होने के कारण मरीज को मेरठ या गाजियाबाद रेफर किया जा रहा है। कुछ निजी चिकित्सकों ने बताया कि ऐसे कई मरीजों की जान जा चुकी है।
ह्दय रोग विशेषज्ञ डा. जीवोत्तम नारंग ने बताया कि बुखार के चलते ब्रेन पर प्रेशर पड़ रहा है। इससे ब्रेन की बारीक नसों के लीक होने की समस्या खड़ी हो रही है। इस कारण ब्रेन में क्लॉट जम रहे हैं। कई ऐसे मरीज क्लीनिक पर आए हैं।
सीएमओ डा.एके सिंह का कहना है कि बुखार से पीड़ित मरीजों को हर संभव इलाज दिलाया जा रहा है। बुखार के कारण ब्रेन अटैक का मामला प्रकाश में नहीं आया है। अन्य कारणों से भी ब्रेन अटैक हो सकता है। फिर भी इस पर नजर रखी जायेगी।