जिले में प्रेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 90 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रचार प्रसार में भी पूरी ताकत झोंकी जा रही है। वहीं चुनाव बहिष्कार का सिलसिला भी लगातार जारी है।
इसको प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है। विकास कार्यों से गुस्साए लोग मतदान नहीं करते हैं तो प्रशासनिक दावों की हवा तो निकलेगी ही मतदान के नतीजों पर भी प्रभाव पड़ेगा।
चुनाव प्रेक्षकों द्वारा हाल ही में कलक्ट्रेट में आयोजित बैठक में चुनाव कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी थी। जिसमें जिला प्रशासन द्वारा मतदाताओं को जागरूकता के लिए किये गए सभी प्रयासों के बारे में बताया गया।
जिससे गदगद होकर प्रेक्षकों ने 90 प्रतिशत मतदान की उम्मीद जताई। उस बैठक में इस बात का जिक्र तक नहीं हुआ कि आए दिन विकास कार्य न होने से गुस्साए लोग मतदान का बहिष्कार कर रहे हैं। जिन्हें प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है।
महमूदपुर अंडरपास मामले में प्रभावित 15 गांवों में करीब 25 हजार वोट हैं। ये गांव प्रशासनिक उपेक्षा पर कायम रहते हैं तो जहां मतदान प्रतिशत गिरेगा वहीं, चुनावी नतीजा भी बदल जाएगा।
इस संबंध में जिलाधिकारी अनिल ढींगरा का कहना है कि जिन स्थानों पर मतदान का बहिष्कार हुआ है। वहां, प्रशासनिक अधिकारियों को भेजकर समझाया गया है। सभी लोग मतदान करेंगे।