एक ओर जहां जन्म से पहले ही बेटियां जुर्म की शिकार होती हैं। वहीं, पैदा होने के बाद भी समाज में उन पर तरह-तरह की बंदिशें लगा दी जाती हैं। कुछ संगठन या संस्थाएं कभी अपराधों के पीछे लड़कियों के आधुनिक पहनावे का हवाला देते हैं तो कभी कुछ। नया फरमान आया है बेटियों के मोबाइल रखने पर।
भाकियू के राष्ट्रीय सचिव ने कक्षा आठ से 12वीं तक की छात्राओं को मोबाइल न देने का फरमान सुनाया है। उनका कहना है कि लड़कियों को मोबाइल देने पर असामाजिक तत्व उन्हें प्रेमजाल में फंसा लेते हैं।
सिंभावली में बुधवार को गन्ना सोसायटी परिसर में आयोजित भाकियू की मासिक पंचायत में राष्ट्रीय सचिव चौधरी सतबीर सिंह ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व क्षेत्र की शांति व्यवस्था और सद्भाव को बिगाड़ने के लिए दूसरे समुदाय की लड़कियों को बहला-फुसला कर प्रेमजाल में फंसा लेते हैं।
इससे क्षेत्र की फिजा खराब होने का खतरा बना रहता है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कक्षा आठ से लेकर 12वीं तक की छात्राओं को मोबाइल नहीं दिए जाने चाहिए। वहीं, इस फरमान को लेकर छात्राओं में आक्रोश है।
प्रिया सैनी ने बताया कि अकेले छात्राओं पर ही बंदिश थोपना उचित नहीं है। आधुनिक दौर में मोबाइल के बिना जिंदगी बसर कर पाना दुश्वार है। छात्रा सोनी का कहना है कि जागरुकता के बिना मोबाइल का दुरुपयोग रोक पाना मुमकिन नहीं है। इसलिए मोबाइल पर रोक लगाने की बजाय छात्राओं को जागरुक करने का अभियान चलाया जाना ज्यादा जरूरी है।