जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों का फर्जीवाड़ा बंद करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसके बाद भी फर्जीवाड़ा जारी था। अब फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रत्येक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों पर क्यूआर कोड डाला जाएगा।
इस कोड की मदद से तुरंत प्रमाणपत्र की सत्यता परखी जा सकेगी। इसके लिए एक एप भी बनाया गया है। शिक्षा संस्थानों में प्रवेश, नौकरी व कई दूसरों कार्यों में जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों की आवश्यकता होती है।
ऐसे में अपने हिसाब से उम्र दर्शाने के लिए इन प्रमाण पत्रों में हेरफेर किया जाता रहा है। इन प्रमाण पत्रों के सत्यापन में भी काफी समय लग जाता था, लेकिन अब प्रमाण पत्र जांच की टेंशन खत्म हो जाएगी।
विभाग के अफसर और कर्मचारी मोबाइल फोन से ही प्रमाण पत्र की सत्यता जान सकेंगे। दरअसल, एंड्रायड मोबाइल फोन यूजर के लिए प्ले स्टोर में क्यूआर स्कैनर के नाम से उपलब्ध है। एप डाउनलोड करने के बाद उसमें क्यूआर कोड डाला जाएगा।
कोड डालने के एक से दो मिनट के अंदर प्रमाण पत्र की सत्यता के साथ ही नाम, पता व उम्र समेत पूरी जानकारी मिल जाएगी। इसके साथ ही जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के ऊपरी तरफ अशोक की लाट और राज्य सरकार का लोगो भी लगाया गया है।
पहले अशोक की लाट नहीं थी। सिर्फ राज्य सरकार का लोगो था। वहीं, नगर पालिका के ईओ संजय मिश्रा ने बताया कि पालिका से जारी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों पर क्यूआर कोड दर्ज किए जा रहे हैं। इस कोड के माध्यम से फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा।