हापुड़। गांव गालंद के रास्ते पर सोमवार रात प्लॉट और रुपये के लेनदेन के विवाद में मारे गए अतुल तोमर अपने कारोबार में साझीदार अनूप की बात मान लेते तो शायद उनकी जान बच जाती। घटना से मात्र दस मिनट पहले ही उन्होंने अतुल को फोन कर घर पहुंचने की सलाह दी थी।
इस फोन के दस मिनट बाद ही आरोपी यहां पहुंचे और अतुल को गोली मार दी। अब पुलिस की चार टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रही हैं लेकिन फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।
पिलखुवा कोतवाली के गालंद निवासी अतुल तोमर को सोमवार रात उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने गांव के ही अशोक के साथ गांव लौट रहे थे। परिजनों ने अस्पताल व गांव गालंद में आरोपियों का एनकाउंटर की मांग करते हुए हंगामा किया था।
इसके बाद एसपी ज्ञानंजय सिंह ने 48 घंटों में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद परिजन अतुल तोमर के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए थे।
इस मामले में अतुल के कारोबार में साझेदार अनूप ने बताया कि उन्होंने सोमवार रात 10ः35 बजे अतुल को फोन किया था। इसके बाद उन्होंने समय अधिक समय होने का हवाला देकर अतुल को तुरंत घर पहुंचने की सलाह दी थी लेकिन अतुल कुछ देर कहीं रुक गए और इस फोन के ठीक दस मिनट बाद आराेपियों ने अतुल की कार रुकवाकर उन्हें गोली मार दी। अतुल ने अनूप की बात मान ली होती तो शायद उनकी जान बच जाती।