नामी कंपनी का सैंपल फेल कराने के खेल के स्टिंग आपरेशन में फंसे चारों आरोपी खाद्य औषधि निरीक्षकों को शासन के आदेश पर निलंबित कर दिया गया है।
मेरठ के सहायक आयुक्त (खाद्य) विजय बहादुर सिंह ने दो की जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इधर, हापुड़ में आईआईए के पदाधिकारियों ने खाद्य औषधि निरीक्षकों के निलंबन पर शासन का आभार जताया है।
पिछले 20 अक्तूबर की रात एक टीवी चैनल पर हापुड़ के तीन और बुलंदशहर के एक खाद्य औषधि निरीक्षक का स्टिंग दिखाया गया था। इसमें सैंपल फेल कराने के खेल का खुलासा किया गया था।
टीवी में चले स्टिंग ऑपरेशन के बाद शासन ने मेरठ के सहायक आयुक्त (खाद्य) विजय बहादुर सिंह को मामले की जांच सौंपी थी।
सहायक आयुक्त ने हापुड़ में दो दिन तक व्यापारियों के बयान भी लिए थे और आईआईए अधिकारियों ने निरोक्षकों की शिकायतें की थीं।
सहायक आयुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शासन ने चारों एफएसओ रमेश चंद (पिलखुवा), शिवदास (बुलंदशहर), केपी सिंह (गढ़) और रामबीर सिंह (हापुड़) को निलंबित कर दिया है।
आईआईए के चैप्टर चेयरमैन अमन गुप्ता, लोकेश सिंहल, विजय अग्रवाल तेल वाले, हापुड़ स्माल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ने दी थी। आईआईए के चैप्टर चेयरमैन अमन गुप्ता का कहना है कि शासन के इस स्वागत किया जाता है।
ये था पूरा मामला
स्टिंग में पिलखुवा के एफएसओ रमेश चंद और गढ़ के एफएसओ केपी सिंह यह दावा करते दिखे कि वे प्राइवेट कंपनी का धंधा जमाने के लिए दूसरी कंपनी का सैंपल फेल करवा सकते हैं।
लैब में नमूना कौन सा भेजा जाएगा, यह फूड सेफ्टी विभाग तय करेगा। एफएसओ सेटिंग के लिए एक लाख रुपये खर्च की बात करते हैं। स्टिंग में हापुड़ और बुलंदशहर के एफएसओ को भी दिखाया गया था।