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Hapur News: 372 पहुंचा एक्यूआई, देश में दूसरे दिन भी सबसे ज्यादा प्रदूषित रही हवा

Fri, 05 Dec 2025 09:56 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के आसपास होने के बाद भी जिले की आबोहवा देश में सबसे अधिक प्रदूषित बनी हुई है। शुक्रवार को वायु प्रदूषण बढ़कर 372 पर पहुंच गया। इस कारण लगातार दूसरे दिन देश में हवा सबसे अधिक प्रदूषित बनी रही।
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एनसीआर क्षेत्र में बड़े-बड़े शहर शामिल हैं। बावजूद इसके जिले की हवा सबसे अधिक प्रदूषित बनी हुई है। सीपीसीबी द्वारा शाम चार बजे जारी किए गए बुलेटिन के अनुसार शुक्रवार को 36 अंक बढ़कर औसत एक्यूआई 372 दर्ज हुआ। हालांकि, बृहस्पतिवार को एक्यूआई कुछ अंक गिरा था, लेकिन शुक्रवार को भी इसका स्तर बढ़ गया, जो रात तक धीरे-धीरे बढ़ता रहा। ऐसे में शनिवार को फिर से एक्यूआई का स्तर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। शुक्रवार को भी हवा की गति मात्र छह किलोमीटर प्रति घंटा रही। वहीं, बहुत खराब श्रेणी में हवा होने के कारण आंखों में जलन और सांस लेने में समस्या बनी हुई है। चिकित्सकों ने बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बता दें कि जिले में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सड़कों पर पानी का छिड़काव न होना, कूड़ा जलना, औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से निकलता धुआं आदि शामिल हैं।
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इस सप्ताह में हालात ज्यादा खराब
एक दिसंबर को जिले का एक्यूआई 324, दो को 379, तीन को 363, चार को औसत एक्यूआई 336 दर्ज हुआ। लगातार बहुत खराब श्रेणी में एक्यूआई रहने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की समस्या बन रही है। इसका असर अस्पतालों में भी दिख रहा है। गले में खराश और खांसी की समस्या के मरीजों की संख्या दोगुना तक बढ़ चुकी है।

आसपास के जिलों में स्थिति
जिले का नाम औसत एक्यूआई
गाजियाबाद 321

ग्रेटर नोएडा 316

मेरठ 302
बुलंदशहर 298
नोएडा 339

दिल्ली 327

नोट : सीपीसीबी के अनुसार।

जिले में ऐसे घटा-बढ़ा वायु प्रदूषण
समय एक्यूआई
सुबह पांच बजे 347

सात बजे 353
नौ बजे 358
11 बजे 361

दोपहर एक बजे 365

तीन बजे 375
शाम पांच बजे 378
नोट : सीपीसीबी के अनुसार।

कोट -

जिले में हवा की रफ्तार कम होने के कारण ही प्रदूषण बढ़ रहा है। हवा की गति बढ़ने के साथ ही इसका स्तर भी कम हो जाएगा। ग्रेप के नियमों का पूरी तरह से जिले में पालन हुआ है। - विपुल कुमार, सहायक अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण विभाग
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