क्षेत्र में कैंसर का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को एक और महिला की मौत से कैंसर से मरने वालों की संख्या 14 हो गई। इससे क्षेत्र में खौफ पसरा हुआ है। शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने अल्लाबख्सपुर गांव में कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की।
चिकित्सकों ने बीमारों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह देने के साथ ही अन्य लोगों को बीमारी से बचाव की जानकारी दी। इससे पहले शुक्रवार को एसडीएम ने भी गांव पहुंचकर बीमारों का हाल जाना था।
नौ हजार की आबादी वाले गांव अल्लाबख्शपुर में कैंसर के कहर ने लोगों की नींद उड़ा दी है। शनिवार को कैंसर से पीड़ित सनव्वर की पत्नी अफसाना (45) ने दम तोड़ दिया। बीमार अफसाना को मेरठ में पेट के कैंसर की पुष्टि की गई थी।
निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी आराम न मिलने पर दिल्ली के जीटीबी में भर्ती कराया गया। महज 38 दिन में 14 मौत हो चुकी हैं। अधिकांश मरीज लीवर और आंतों के कैंसर से ही पीड़ित थे।
हाल ही में 12 जून को फरजाना और 15 जून को खलील अब्बासी की मौत हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश परिवार खेती व मजदूरी पर निर्भर हैं। बीमारी में कई परिवारों को अपनी जमीन बेचनी पड़ीं है। कई परिवारों की जमीन अभी गिरवी रखी हैं।
शुरूआत में लापरवाह बनें अफसरों ने अब कैंसर से लगातार हो रही मौतों को गंभीरता से लिया है। इसके चलते शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव के मदरसे में कैंप लगाकर लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण किया। चिकित्सकों ने प्रधान पति फराहीम के साथ हेपेटाइटिस और कैंसर से पीड़ित मरीजों के घर जाकर उनका हालचाल जाना।
सीएचसी अधीक्षक डॉ.एसपी सिंह ने बताया कि कैंप में ढाई सौ मरीजों का परीक्षण कर कई के ब्लड सैंपल जांच को भिजवाए हैं। चिकित्सकों ने बताया कि गांव के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने को अगले सप्ताह कैंप लगाया जाएगी।
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो.अब्बास अली कहते हैं कि भूजल दूषित होता जा रहा है। इसलिए हेपेटाइटिस और कैंसर से प्रभावित गांवों में रहने वालों की सुरक्षा के लिए पाइपलाइन पेयजल की सप्लाई जरूरी है।