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अल्लाबख्शपुर गांव में कैंसर से एक और मौत

Thu, 15 Jun 2017 09:25 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
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कैंसर का कहर - फोटो : अमर उजाला
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अल्लाबख्शपुर गांव और आसपास के इलाकों में कैंसर का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांव में बृहस्पतिवार को कैंसर से एक और मौत हो गई। इसके साथ ही बीते पांच सप्ताह में गांव में कैंसर से मरने वालों की संख्या 13 हो गई है।
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डीएम से लगायत सीएमओ तक की गंभीरता का आलम यह है कि बीते 18 दिन से गांव वालों को सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी गांव में जांच के लिए कोई टीम नहीं पहुंची।

ब्रजघाट गंगानगरी से जुड़े हाईवे किनारे स्थित गांव अल्लाबख्शपुर में कैंसर के कहर से 9 हजार की आबादी बुरी तरह खौफजदा है। गांव में हर दूसरे-तीसरे दिन कैंसर से मौत हो रही है। दो दिन पहले यानि 12 जून को कैंसर से किसान अफरोज खां की पत्नी फरजाना ने दम तोड़ दिया।
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उसकी मौत का मातम अभी थमा भी नहीं था कि बृहस्पतिवार को मजदूर खलील अब्बासी (50) की मौत हो गई। खलील के परिजनों ने बताया कि तीन माह पहले जांच में आंतों में कैंसर की पुष्टि हुई थी। तब से खलील का मेरठ के निजी चिकित्सक से इलाज चल रहा था। तमाम कोशिशों के बाद भी खलील की जान नहीं बच सकी।

गांव में टंकी का निर्माण न होने से ग्रामीणों को हैंडपंपों से निकल रहा दूषित पानी पीना पड़ा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी भी यह मानते हैं कि दूषित पानी पीने के कारण ही ग्रामीण कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।

बावजूद इसके आज तक ग्रामीणों को पीने योग्य पानी मुहैया करवाने की कोई पहल नहीं की गई। दो दिन पहले डीएम कृष्णा करुनेश ने भी यह वादा किया था कि गांव में टीम जांच के लिए पहुंचेगी, लेकिन बृहस्पतिवार को भी कोई टीम जांच के लिए नहीं पहुंची।

प्रो. अब्बास अली कहते हैं कि फैक्ट्रियों के दुष्प्रभाव और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल होने करीब तीन सौ फुट गहराई वाला पानी दूषित हो चुका है। इसलिए गांव में टंकी से पेयजल की सप्लाई करवाना बेहद जरूरी है।

कैंसर से इन्होंने तोड़ा दम
पांच सप्ताह के भीतर गांव में कैंसर से आस मुहम्मद, शरीफ, बुंदू, इलियास, कनीज, महफूदा, अफसरी, शफातुल्ला, इदरीस, खालिद, संतबीर, फरजाना और खलील की मौत हुई है।

वहीं शमशाद, मरगूब, अफसाना, मुस्तकीना, फरजाना, खलील, तौसीफ, जब्बार, नरेश समेत करीब दो दर्जन ग्रामीण कैंसर की गिरफ्त में हैं। इनमें से अधिकतर लीवर कैंसर से पीड़ित हैं। ज्यादातर मरीजों को मेरठ-दिल्ली के अस्पतालों के चिकित्सक जवाब दे चुके हैं।
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