मोदीनगर रोड स्थित जसरूपनगर गांव के सैकड़ों लोग जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है।
साथ ही लोगों ने किसी राजनेता को भी गांव में न घुसने देने की चेतावनी दी है। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को लोगों की प्रतिक्रिया जानी तो राजनेता, प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति उनका गुस्सा फूट पड़ा।
जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित जसरूपनगर गांव विकास को तरस रहा है। इसका मुख्य मार्ग कीचड़ में तब्दील हो चुका है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त प्रदूषित पानी लोगों के घरों के बाहर भरा हुआ है।
मौसम चाहे सर्दी का हो या गर्मी का गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप लगातार बना रहता है। हजारों की आबादी वाले इस गांव का कुछ हिस्सा तो ग्राम प्रधान के रहमो करम पर संपन्न है, लेकिन अधिकांश भाग अपनी बदहाली पर आंसु बहा रहा है।
आलम यह है कि लोगों को गांव में प्रवेश करने के लिए भी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। चुनाव के दौरान तो राजनेताओं का इस गांव में आना जाना लगा रहता है, हर राजनेता ग्रामीणों को बदहाली से राहत दिलाने का सपना दिखाता है।
चुनाव संपन्न होते ही ग्रामीणों की आस पर पानी फेर दिया जाता है। यही कारण है कि इस बार ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है, साथ ही किसी राजनेता को भी गांव में नहीं घुसने देने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों की समस्याओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द ही मौके का निरीक्षण कर समस्याओं का निस्तारण कराया जाएगा। मीनू राणा, एसडीएम
जसरूपनगर गांव में जहरीले पानी के सेवन से कैंसर तेजी से फैल रहा है। आलम यह है कि पिछले दो वर्ष में पप्पू, रमेश, सत्यवीर, रुपेश, सुमन, रामकली की मौत कैंसर के कारण हो चुकी है। वहीं, पप्पू, बालिराम अभी भी कैंसर से जूझ रहे हैं।
इन लोगों ने भी सरकारी चिकित्सा सुविधा न मिलने व नेताओं पर अनदेखी का आरोप लगाया है। गुस्साए लोगों ने मंगलवार को नेता व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। इस मौके पर किशन कुमार, सचिन, किशन चंद, अमित, गजेंद्र, हरि, दर्शन मौजूद रहे।