हापुड़। गांवों में पशुओं की मौत निमोनिया के कारण हुई थी। पशुपालन विभाग की टीमों ने इसकी पुष्टि की है। बरसात और कोहरे से संक्रमण फैला था, जो अब धूप खिलने के बाद कम हो गया है। टीकाकरण भी जिले में शुरू कर दिया गया है।
जिले के चारों ब्लॉकों में बरसात के दौरान 60 से अधिक पशुओं की मौत होने का मामला सामने आया था। ग्रामीणों का कहना था कि स्वस्थ होने के बावदूद एक से दो घंटे में ही पशुओं की मौत हो गई। पहले गलघोंटू, खुरपका, मुंहपका के कारण मौत होने का अंदेशा जताया जा रहा था।
सीवीओ डॉ.एनएन शुक्ला ने टीमों के साथ काठीखेड़ा, सलाई समेत कई गांवों का निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि पशुओं की मौत फेफड़ों में संक्रमण (निमोनिया) के कारण हुई। क्योंकि किसी पशु में गलघोंटू, खुरपका, मुंहपका नहीं था।
उन्होंने बताया कि निमोनिया होने पर पशुओं में बुखार 107 से ऊपर पहुंच जाता है, जबकि अन्य बीमारी में 103 तक ही पहुंचता है। निमोनिया के कारण ही पशु की अचानक मौत हो जाती है। कोहरा और बारिश के कारण ही पशुओं की मौत हुई थी। जिले में अब टीकाकरण भी शुरू कर दिया गया है।
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गांवों का सर्वे किया जा रहा है, बरसात के दौरान ही पशुओं में संक्रमण फैला था। अब सब कुछ सामान्य है, लगातार गांवों में कैंप लगाए जा रहे हैं।डॉ.एनएन शुक्ला, सीवीओ।