गरीब-मजदूर और किसानों से एकजुटता का आह्वान कर जयंत चौधरी ने मोदी और अखिलेश सरकार को किसान विरोधी बताया। वहीं जरूरत पड़ने पर चुनाव बाद किसान हित की सोच रखने वाली पार्टी से गठबंधन होने का इशारा भी किया।
वह बुधवार को सिंभावली में हाईवे किनारे स्थित किसान पीजी कॉलेज के मैदान में रालोद प्रत्याशी कुंवर अय्यूब अली के पक्ष में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी और सूबे की अखिलेश सरकार किसान विरोधी हैं। किसान गन्ने का पेमेंट लेने के लिए आंदोलन करने को मजबूर है।
इसके बावजूद उनको एक साल तक भुगतान नहीं मिलता है। चौधरी चरण सिंह जब केंद्र में मंत्री बने थे, तो उन्होंने ग्राम विकास मंत्रालय का गठन कर देहात में विकास की गंगा बहाई थी। अब यूपी विकास में पिछड़ रहा है। वेस्ट यूपी के राजस्व को अति पिछड़े पूर्वी यूपी के विकास पर खर्च किया जाता है।
बसपा ने सारा खजाना पार्क और मूर्तियों में बर्बाद कर दिया। अगर जरूरत पड़ी तो चुनाव बाद किसान हित वाली पार्टी से गठबंधन हो सकता है। रालोद को सत्ता में भागीदारी मिलने पर कृषि बजट अलग से पेश कराया जाएगा, ताकि बदहाली में घिरे किसान-मजदूरों के विकास की योजनाओं पर काम हो सके।
उन्होंने विकास, शांति और खुशहाली के लिए रालोद प्रत्याशी को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों की एक जाति होती है, ऐसे में सभी को एकजुट होकर राजनीतिक मंच पर आने की जरूरत है। अध्यक्षता प्रधान वीरपाल और संचालन जिलाध्यक्ष शिवकुमार त्यागी ने किया।
राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, प्रदेश सचिव अब्बास अली, चुनाव प्रभारी सोनी सिंह, अजयवीर, युवा जिलाध्यक्ष गौरव प्रताप, तारिक राणा, चेयरमैन तसव्वर, रामनाथ सिंह, तेजपाल चौधरी, कपिल बिसला, अमन सिरोही, राजकुमार चौधरी, प्रिंसिपल हाजी सदाकत, प्रधान कमाल, देवीदास कश्यप,
कुलदीप राठी, अमरजीत नेहरा, अफजाल प्रधान, डॉ.नौशाद समेत हजारों समर्थक मौजूद रहे। इस मौके पर सपा के पूर्व विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष मुजम्मिल अहमद ने रालोद का दामन थामा।
जयंत चौधरी ने कहा कि सपा में चल रहा झगड़ा सत्ता की बजाए ठेकेदारी का है। लखनऊ में 600 मीटर मेट्रो लाइन बिछाई गई है। उसका ठेका 15 हजार करोड़ में छूटा था, जिसे कब्जाने को लेकर चाचा-भतीजे में हुआ मनमुटाव सियासी जंग में तब्दील हो गया है।
भाजपा झूठी पार्टी है, जिसने अमीर घरानों को फायदा पहुंचाने के मकसद से नोटबंदी का तुलगकी फैसला कर लोगों को परेशान कर दिया है। हजारों करोड़ का बजट जारी करने के बाद भी गंगा सफाई पर कोई काम नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि कैराना से पलायन का राग अलापकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाली भाजपा ने घोषणा पत्र में इसका भी कोई उल्लेख तक नहीं किया है।