नकली देसी घी की फैक्ट्री का भंडाफोड़ होने के बाद अब प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों ने संयुक्त टीम बनाकर मिलावटखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव सदरपुर में पांच सालों से नकली देसी घी बनाकर उसे राज्य कर्मचारी कल्याण निगम समेत सरकारी कैंटीनों में सप्लाई करने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ होने से मिलावटखोरी करने वाले सिस्टम के रडार पर आ गए हैं।
इनकी धरपकड़ के लिए तहसील प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम संयुक्त रूप में छापामार अभियान चलाएगी।
एसडीएम आरएन पांडेय और खाद्य सुरक्षा अधिकारी एचपी सिंह का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी स्तर पर खाने पीने वाली चीजों में कोई भी मिलावटखोरी नहीं होने दी जाएगी।
संयुक्त टीम बनाकर बड़े स्तर पर छापामारी की जाएगी। एसडीएम ने दावा किया कि मिलावटी और नकली खाद्य सामग्री बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फैक्ट्री से लिए गए नमूनों की जांच में अगर इंसानी सेहत के लिए घातक तत्व पाए गए तो फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस दायर होगा। इसमें आजीवन कारावास सहित पांच लाख के जुर्माने की सजा हो सकती है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी एचपी सिंह का कहना है कि उत्पादन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर खामी पाए जाने पर फैक्ट्री को सील कर घी के छह नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला को भेजा गया है। अगर जांच में यह बात साबित हो जाती है कि वेजीटेबल फैट स्प्रेड की आड़ में तैयार किए जा रहे घी में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल किया गया था,
जो इंसानी जिंदगी के लिए हानिकारक हैं तो फिर फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया जाएगा। इसमें आजीवन कारावास के साथ ही पांच लाख के जुर्माने की सजा का प्राविधान है।