जिले में सरसों के तेल और रिफाइंड के नमूने फेल होने के बाद डीएम की ओर से कार्रवाई तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को डीएम ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के साथ-साथ नौ विभागों का चार्ज एडीएम से छीन लिया है।
डीएम ने सभी नौ विभागों को अपने अधीन कर लिया है। इस कार्रवाई को तेल मामले में हो रही वसूली से जोड़कर देखा जा रहा है। डीएम द्वारा जिले के विभागों का बंटवारा सीडीओ, एडीएम व सभी एसडीएम को किया गया था।
जिसमें एडीएम के पास राजस्व से जुड़े मुख्य विभाग जिनमें आबकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, आयुध व खनन जैसे विभाग दिए हुए हैं। एडीएम रजनीश राय द्वारा इन विभागों का कामकाज देखा जाता था।
दादाबाड़ी से सरसों के तेल और रिफाइंड के नमूने भरने और फिर फेल होने के बाद कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि उंगली प्रशासनिक अधिकारियों पर उठ रही है। चर्चा है कि तेल के कारखानों से इसके एवज में मोटी कमाई वसूली जाती थी।
यह बातें जांच में उजागर होने के बाद कार्रवाई मानी जा रही है। डीएम ने सभी नौ विभाग अपने अधीन किए हैं। विभागों में जिला आबकारी विभाग, अधिकारियों /कर्मचारियों की सेवा निवृत्त/ मृत्यु हो जाने पर पेंशन/ बीमा/ सामान्य भविष्य निधि प्रकरणों को
स्वीकृत प्राधिकारी को प्रेषित करना एवं उनकी अंतिम पेंशन, उपादान आदि 90 प्रतिशत तक भुगतान स्वीकृत करने हेतु, कलक्ट्रेट कर्मचारियों को सामान्य भविष्य निधि से अस्थायी/स्थायी अग्रिम स्वीकृत करने हेतु, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, आयुध,
खंडसारी सल्फर लाइसेंस नवीनीकरण, खाद्य एवं रसद तथा विपणन, मंडी, खनन शामिल हैं। हालांकि यह कार्रवाई एडीएम की अनुपस्थिति में हुई है वह छुट्टी पर हैं।
नमूने फेल होने के बाद सरसों के तेल के कारखाने को सील करने को लेकर दिन भर अधिकारियों की हीलाहवाली चलती रही। कारखाना सीज करने के कयास जरूर लगते रहे। शाम तक कारखाना सीज नहीं हो सका।
शाम के समय खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन के अधिकारी कारखाने पर पहुंचे, लेकिन केवल स्टॉक की जांच करने की बात कहते रहे। कारखाने का ताला बंद होने के कारण अधिकारी स्टॉक की जांच भी नहीं कर सके और काफी देर तक ताला खुलने का इंतजार कर चले गए।
डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि मिलावटखोरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।