हापुड़। एनएच-09 पर बेहिसाब फर्राटा भरने भरने वालों पर तीसरी आंख नजर रखेगी। माना जा रहा है कि इससे हाईवे पर होने वाले हादसों को रोकने में मदद मिलेगी। इसके लिए जिंदल नगर और सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। मोबाइल का प्रयोग करने, बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाने पर भी ऑटोमेटिक रूप से चालान कट जाएगा। कैमरों को स्थानीय पुलिस-प्रशासन के सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। जरूरत पड़ने पर रिकॉर्डिंग देख सकेंगे। कैमरे से चालान की प्रक्रिया तुरंत होगी।
जनपद में एनएच-09 पर लगातार सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रहीं हैं। दुर्घटनाओं में मौतों और घायलों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। इन हादसों को रोकने के लिए उपाय करने की बात जिला प्रशासन कई बार कह चुका है। पिछले दिनों भी हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सीडीओ श्रुति शर्मा ने हादसों को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए थे।
इससे पहले भी पिछले दो वर्षों से हो रही बैठकों में एनएच-09 पर कैमरे लगाने के आदेश एनएचएआई को दिए गए थे। एनएचएआई ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। अब करीब ढाई करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस धनराशि से जिले में दो स्थानों पर सड़क के दोनों तरफ कैमरे लगवाए जाएंगे। जिससे कि एनएच-09 पर सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके। इसके लिए सबसे पहले निजामपुर से जिंदल नगर तक क्रिटिकल एरिया को चुना गया है। संवाद न्यूज एजेंसी ने इस मुद्दे को उठाया था। अमर उजाला में इससे संबंधित 26 मई को खबर प्रकाशित की गई थी।
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हाईवे 09 पर यह है स्पीड लिमिट
छोटे चार पहिया वाहन यानी कारें अधिकतम 100 किमी/घंटा तक। दोपहिया वाहन बाइक अधिकतम 80 किमी/घंटा तक। यात्री बसें और भारी वाहन अधिकतम 90 से 100 किमी/घंटा, वाणिज्यिक वाहन (ऑटो और छोटे कमर्शियल वाहन) अधिकतम 40 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते हैं।
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जनपद में ब्लैक स्पॉट 21
राष्ट्रीय राजमार्ग पर ब्लैक स्पॉट - 15
यह होता है एएनपीआर कैमरा
एएनपीआर का पूरा नाम ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन है। यह एक विशेष प्रकार की उन्नत तकनीक (स्मार्ट कैमरा सिस्टम) है, जो वाहनों की नंबर प्लेट को स्वचालित रूप से पढ़ने, पहचानने और उसे डिजिटल टेक्स्ट (डेटा) में बदलने के लिए डिजाइन की गई है। पुलिस इन कैमरों का उपयोग संदिग्ध, चोरी हुए या नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को ट्रैक करने के लिए करती है। साथ ही तेज रफ्तार, रेड लाइट जंप करने या प्रतिबंधित और पुरानी गाड़ियों का पता लगाने के लिए भी उपयोग कर सकती है।
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मुख्य रूप से तीन चरणों में काम करता है सिस्टम
1. इमेज कैप्चर : ये कैमरे हाई-रिजॉल्यूशन और इन्फ्रारेड तकनीक से लैस होते हैं। जो खराब रोशनी, रात या बारिश में भी चलते हुए वाहन की स्पष्ट तस्वीर खींच लेते हैं।
2. ओसीआर प्रोसेस : ओसीआर सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों का विश्लेषण करके नंबर प्लेट पर लिखे अक्षरों और अंकों को टेक्स्ट में बदल देता है।
3. डेटाबेस मिलान : पहचाने गए नंबर को तुरंत पुलिस या ट्रैफिक विभाग के सर्वर और डेटाबेस से मिलाया जाता है।
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कोट
केंद्र सरकार की ओर से करीब ढाई करोड़ रुपये की स्वीकृति कैमरे लगाने के लिए मिली है। जिले में दोनों स्थानों पर 20 जून तक कैमरे लगा दिए जाएंगे। इन्हें स्थानीय पुलिस-प्रशासन के सिस्टम से भी जोड़ा जाएगा। - अमित शर्मा, जनरल मैनेजर, रियाती गृही, एनएचएआई
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जिले में जनवरी से लेकर अप्रैल 2026 तक हुए चालान
बिना हेलमेट 3265
बिना सीट बेल्ट 1578
तेज रफ्तार 1386
जनपद में हुई सड़क दुर्घटनाएं
वर्ष हादसे घायल मौत
2023 360 264 215
2024 377 312 268
2025 421 342 298
2026 में जनवरी से अप्रैल तक 140 हादसे हुए इनमें 136 लोग घायल हुए और 80 लोगों की मौत हो गई।