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जमीन नहीं देंगे किसान अब घोषित होगा अवार्ड

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हापुड़ । मेरठ रोड पर आवास एवं विकास परिषद की आवासीय योजना संख्या -3 के लिए किसान किसी कीमत पर भूमि देने या वार्ता करने के लिए तैयार नहीं है। इस कारण अब परिषद के अधिशासी अभियंता ने गाजियाबाद के एडीएम (भू.अर्जन) से इस योजना को शीघ्र अवार्ड घोषित कराने के लिए पत्र भेजा है।
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शहर में आवास एवं विकास परिषद की दो आवासीय योजना पहले से ही विकसित हैं। एक बुलंदशहर रोड पर आवास विकास कालोनी और दूसरी मेरठ रोड पर संजय विहार आवास विकास कालोनी है। तीसरी आवासीय योजना मध्य गंग कालोनी के पीछे असौड़ा गांव के किसानों की जमीन पर प्रस्तावित है। इसी योजना के संबंध में आवास एवं विकास परिषद निर्माण खंड-10 मंडोला विहार के अधिशासी अभियन्ता राजीव कुमार ने गाजियाबाद/हापुड़ के अपर जिलाधिकारी (भू.अर्जन) को पत्र भेजकर बताया कि जिलाधिकारी हापुड़ के निर्देश पर तहसील और आवास विकास परिषद की संयुक्त टीम ने 19 नवंबर को योजना के लिए चयनित भूमि के सभी 53 खसरा नंबरों की जांच कर संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि किस खसरा नंबर की भूमि पर क्या बना है या फिर खेती हो रही है। उन्होंने पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है कि वह उक्त योजना संख्या तीन को शीघ्र अवार्ड घोषित करा दें।

किसान जाएंगे कोर्ट,करेंगे आंदोलन
हापुड़। किसान आवास एवं विकास परिषद को जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। इसके साथ बड़ी संख्या योजना के लिए चयनित भूमि के काफी भाग पर मकान और बड़े बड़े भवन बने हैं। किसान राकेश त्यागी का कहना है कि भूमि किसी भी हाल में नहीं दी जाएगी। अवार्ड कराकर भूमि आवास विकास लेना चाहता है लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। अदालत की शरण में जाएंगे।
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क्या है अवार्ड
किसी भी योजना के लिए अगर प्रशासन और किसानों के बीच करार की सहमति नहीं होती है, तब जिला प्रशासन संबंधित योजना को भूमि लेने के लिए अवार्ड घोषित करा देता है। ऐसा होने पर शासन अपनी व्यवस्थानुसार भूमि के रेट घोषित देता है। ऐसे में अगर किसान मुआवजा नहीं लेते तो कोर्ट में जमा करा दिया जाता है तथा जमीन का अर्जन कर लिया जाता है।

अब तो नया भूमि अधिग्रहण नियम लागू हो गया है। मुआवजा नए कानून के अनुसार ही दिया जाएगा लेकिन किसान वार्ता तो करें। अवार्ड की कार्यवाही तो मजबूरी में करानी पड़ रही है।
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राजीव कुमार,अधिशासी अभियंता,आवास एवं विकास परिषद निर्माण खंड -10
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