गढ़मुक्तेश्वर। अब इंतजार की घड़ी समाप्त हो चुकी है, क्योंकि उत्तरी भारत के मिनी कुंभ के रूप में विख्यात गढ़ खादर के पौराणिक मेले में श्रद्धालुओं समेत विभिन्न काम-धंधों से जुड़े व्यापारियों का आगमन प्रारंभ हो चुका है। परंतु अभी तक मेले स्थल से जुड़ीं अधिकांश व्यवस्थाएं पूरी तरह नदारद हैं, जिससे पड़ाव डालने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
खादर मेला स्थल समेत संपर्क मार्गों पर अभी तक पथप्रकाश, पेयजल और सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं हो पाया है। मेला क्षेत्र में साढ़े चार सौ से भी अधिक हैंडपंप लगाए जाने का दावा किया जा रहा है, परंतु अभी तक एक भी हैंडपंप नहीं लग पाया है। वहीं मेला स्थल समेत संपर्क मार्गों पर अस्थाई पथप्रकाश की सुविधा भी चालू नहीं हो पाई है। गंगा किनारे भूकटान के चलते अस्थाई स्नानघाट तैयार करने का दावा भर रहे जिला पंचायत विभाग को फिलहाल अपेक्षित स्तर पर काम करने का कोई भी मौका नहीं मिल पा रहा है। बीते दिन ही निरीक्षण के दौरान डीआईजी रमित शर्मा ने मुख्य रूप से रूट सेक्टरों से जुड़े 10 थानों को रविवार से प्रारंभ कर उनमें दारोगा समेत पुलिस वालों की तैनाती करने की हिदायत दी थी, परंतु रविवार शाम तक इस पर अमल नहीं हो पाया।