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तड़के बजने लगेंगे शिवालय के घंटे

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हापुड़/गढ़/पिलखुवा/धौलाना । हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लेकर अपने शहरों में पहुंच चुके कांवड़िये सोमवार को शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। जिले भर के शिवमंदिरों में इसके लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। विभिन्न मंदिरों, शहर के प्रमुख मार्गों और मिश्रित आबादी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कांवड़ियों का मंदिरों पर पहुंचना भी शुरू हो गया है।
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प्राचीन सबली मंदिर पर दोपहर 1.31 मिनट पर कांवड़िये जलाभिषेक शुरु करेंगे। श्री शिव मंदिर समिति सबली के प्रधान ललित कुमार छावनी वालों ने बताया कि श्रद्धालु सुबह चार बजे से जलाभिषेक कर सकते हैं। भीड़ के मद्देनजर बेरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग से केवल कांवड़िये और पैदल श्रद्धालु ही जाएंगे। इस मार्ग पर कोई वाहन नहीं चलेगा। वाहनों के लिए पार्किंग एचपीडीए की आनंद विहार योजना में रोड नंबर 3 पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। उधर बाबूगढ़ क्षेत्र के ग्राम छपकौली स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर भी जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था की गई है। चंडी मंदिर में भी जलाभिषेक का विशेष इंतजाम किया गया है।

जिले के प्रमुख शिवमंदिर
सबली मंदिर
चंडी मंदिर
चंडी मंदिर पिलखुवा
छपकौली शिव मंदिर
नक्का कुआं मंदिर गढ़मुक्तेश्वर
ग्राम दहपा स्थित शिव मंदिर

4 जोनल और 12 सेक्टर मजिस्ट्रेट गश्त पर रहेंगे
हापुड़। एसडीएम हापुड़ समस्त तहसील क्षेत्र, तहसीलदार कोतवाली हापुड़ नगर, तहसीलदार न्यायिक हाफिजपुर क्षेत्र, नायब तहसीलदार हापुड़ हापुड़ देहात क्षेत्र, नायब तहसीलदार बाबूगढ़ बाबूगढ़ क्षेत्र, एसडीएम गढ़ समस्त तहसील क्षेत्र, तहसीलदार गढ़ कोतवाली गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र, नायब तहसीलदार गढ़मुक्तेश्वर बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र, खंड विकास अधिकारी सिंभावली थाना क्षेत्र, एसडीएम धौलाना समस्ता धौलाना तहसील क्षेत्र, तहसीलदार धौलाना थाना पिलखुवा क्षेत्र, नायब तहसीलदार धौलाना थाना धौलाना क्षेत्र में मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे। अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) सत्यप्रकाश पटेल को जनपद भर में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभारी रहेंगे । अपर पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व को लेकर सभी तैयारी पूरी हैं। कांवड़िया बड़ी संख्या में लौट रहे हैं। इसलिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई हैं।
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627 वर्षों से भी अधिक पुराना है सबली मंदिर
हापुड़। ग्राम सबली स्थित प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास जन श्रुतियों के आधार पर करीब 627 वर्ष से भी अधिक पुराना है। सात पीढ़ी पूर्व एक दिन महताब सिंह अपने खेत की जुताई करा रहे थे कि हल का फल किसी पत्थर से टकरायां आसपास की मिट्टी हटाने पर देखा तो वह लाल चित्तीदार पत्थर का शिवलिंग था। अपने खेत में शिव को प्रकट हुआ जानकार उसी स्थान पर ग्रामवासियों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर में विराजमान एक मुंह शिवलिंग पर नीचे की ओर भगवान शंकर का चेहरा, मुंह, आंखें, नाक कान व जटायें आदि के स्पष्ट दर्शन होते हैं। श्रावण माह में पूरे महीने भर यहां शिवभक्तों का मेला रहता है। यहां दिल्ली, हरियाणा व आसपास के दूरस्थ स्थानों से भक्तगण, भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं। बड़ी संख्या में शिवभक्त यहां पर कांवड़ लाकर भगवान जलाभिषेक करते हैं।


परशुराम ने की थीझारखंडेश्वर मंदिर की स्थापना
गढ़मुक्तेश्वर। मुक्तेश्वरा महादेव मंदिर की स्थापना शिवगण और कल्याणेश्वर तथा लाल मंदिर दत्तियाना में शिवलिंग की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। महाभारत कालीन गढ़मुक्तेश्वर तीर्थनगरी के नक्का कुआं मंदिर में मुक्तेश्वरा महादेव मंदिर की स्थापना भगवान शिव के गणों ने की थी। गंगा मंदिर के कुलपुरोहित पंडित संतोष कौशिक बताते हैं कि शिव के गणों ने मुक्तेश्वरा महादेव मंदिर में शिवलिंग की स्थापना कर उसकी पूजा अर्चना और रुद्राभिषेक किया था, जिससे उन्हें दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्ति मिल पाई थी। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में बने झारखंडेश्वर मंदिर, कल्याणपुर के कल्याणेश्वर मंदिर, दत्तियाना के लाल मंदिर की स्थापना कर भगवान परसुराम ने उनमें शिवलिंग स्थापित किए थे। जिनमें जलाभिषेक करने का विशेष महत्व माना जाता है। कल्याणेश्वर और लाल मंदिर के विषय में यह किवदंती भी विख्यात है कि इनका निर्माण एक ही रात में अदृश्य शक्तियों ने किया था।


प्यावली के प्राचीन शिव मंदिर
गांव के बडे़ बुर्जर्ग बताते हैं कि सैंकड़ों साल पहले नहर के किनारे एक किसान पशु चरा रहा था तभी अचानक शिवलिंग प्रकट हो गया। जो देखते ही देखते जमीन से काफी बाहर आ गया। तभी ग्रामीणों के सहयोग से वहां एक भव्य शिवमन्दिर का निर्माण कराया गया। सावन, फाल्गुन मास, दीपावली, दशहरा पर लोग भारी संख्या में आकर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते है। श्रवण मास व फ ाल्गुन मास पर यहां विशाल मेला लगता है। सोमवार को होने वाले जलाभिषेक के लिए मन्दिर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है।

मिथुन के चंद्रमा में भद्रा वास स्वर्ग में रहता है
पंडित रमाशंकर तिवारी और प्राचीन पंचायती मंदिर के पुजारी पंडित सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि के जलाभिषेक पर्व के दौरान कुछ लोग अनावश्यक रूप में भद्रा का उल्लेख कर भ्रम पैदा कर देते हैं, जो पूरी तरह मिथ्या है। ध्यान रहे कि मिथुन के चंद्रमा में भद्रा वास स्वर्ग में रहता है, जो शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ घड़ी मानी जाती है। उन्होंने बताया का भद्रा दोपहर में 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगी, जो चंद्रमा के कर्क राशि में प्रवेश करते ही मृत्युलोक में आ जाएगी। 11 बजकर 11 मिनट से विष्टि का पुच्छकाल प्रारंभ हो जाएगा, जिसे सब कर्मो में सिद्धि देने वाला माना गया है।
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