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स्वाइन फ्लू का भ्रम फैला रहा निमोनिया का वायरल

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स्वाइन फ्लू का भ्रम फैला रहा निमोनिया का वायरल
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हापुड़। निमोनिया का वायरल मरीजों में स्वाइन फ्लू का भ्रम पैदा कर रहा है। दोनों ही रोगों में एक समान लक्षण मिलने के कारण बिना जांच चिकित्सक पहचान नहीं पा रहे कि मरीज को क्या बीमारी है। सुरक्षा की दृष्टि से यह लक्षण मिलने पर मरीज को टेमी फ्लू दवा खिलाई जा रही है। जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 29 पहुंच गई है।
चिकित्सकों की माने तो एच1एन1 इंफ्लुएंजा ग्रुप का आरएनए वायरस है। इसके आठ भाग होते हैं, लेकिन भारत में एन1एच1 और एच3एन2 का संक्रमण ज्यादा होता है। इस वायरस के प्रोटीन में हर साल आंशिक परिवर्तन होता है। इसी वजह से एच1एन1 की वैक्सीन हर साल बदलनी पड़ती है।
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इस साल स्वाइन फ्लू के मरीजों की बढ़ती तादाद के साथ ही वायरल निमोनिया के केस भी बढ़े हैं। दोनों के सामान लक्षण होने से कई अस्पतालों में इन्हें संदिग्ध मरीज मानकर इलाज चल रहा है। वायरल निमोनिया के दर्जनों मरीज टेमीफ्लू भी ले रहे हैं। दोनों की रोगों में फेफड़ों तक वायरल के पहुंचने पर मरीज की जान को खतरा होता है।
यह है निमोनिया के लक्षण
निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है जिसमें फेफड़े में संक्रमण हो जाता है। यह फंगस, वायरस और बैक्टीरिया से होता है, लेकिन वायरस सर्वाधिक खतरनाक है। बच्चों की 18 फीसदी मौतों की वजह निमोनिया है। इससे फेफड़ों में सूजन आने से सांस फूलती है। यही लक्षण स्वाइन फ्लू में भी देखने को मिलते हैं।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डा.राजवीर सिंह का कहना है कि स्वाइन फ्लू और निमोनिया के मरीजों में एक जैसे लक्षण मिल रहे हैं। हालांकि दोनों की रोग से पीड़ित मरीजों पर खास ध्यान रखा जा रहा है। जिले के 29 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है।
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