प्रसूताओं का भोजन डकार रहा सीएचसी प्रबंधन
-दोपहर, रात के समय नहीं मिलता मेन्यू अनुसार खाना, -अस्पताल में भूखे पेट रहने को मजबूर महिलाएं
-सुबह नाश्ते में मिल रहा कच्चा दूध, गर्म कराने को खर्च करने पड़ रहे 10 रुपये
-हर साल सरकार प्रसूताओं के खाने के लिए आवंटित करती है लाखों का बजट
जतिन त्यागी
हापुड़। गढ़ रोड स्थित सीएचसी में प्रसूताओं के भोजन को सीएचसी प्रबंधन डकार रहा है। यहां वार्डों में भर्ती महिलाओं को मेन्यू के अनुसार खाना नहीं मिल रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि नाश्ते में मिलने वाले कच्चे दूध को गर्म कराने के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। दस बजे तक प्रसूताओं को नाश्ते की बाट जोहनी पड़ती है। वहीं रात में सुरक्षा रामभरोसे होने के कारण मरीजों में भय बना रहता है।
सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं को 48 घंटे तक भर्ती रखा जाता है। इस दौरान उनके खाने की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। इसके लिए सरकार प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का बजट आवंटित करती है। एक दिन में एक प्रसूता को 100 रुपये के हिसाब से सरकार बजट देती है, लेकिन सीएचसी में इनके भोजन के बजट में गड़बड़झाला देखने को मिला है।
मेन्यू के अनुसार प्रसूताओं को सुबह के समय आधा लीटर दूध, ब्रेड और 20 ग्राम मक्खन दिया जाता है। दोपहर के समय मूंग की दाल की खिचड़ी व रात के समय दलिया और सोयाबीन की बड़ी दी जाती है, लेकिन सीएचसी प्रबंधन की लापरवाही से प्रसूताओं को भोजन परोसने में अनियमितता बरती जा रही है।
बुधवार को अमर उजाला की टीम ने प्रसूताओं का हाल जाना तो उन्होंने बताया कि सुबह के समय नाश्ता करीब 10 बजे तक मिलता है। दूध कच्चा दिया जाता है, जिसे गर्म कराने पर 10 रुपये खर्चने पड़ते हैं। दोपहर के समय सिर्फ आधी कटौरी खिचड़ी मिलती है, जिससे पेट नहीं भरता। शाम के समय मिलने वाले दलिया की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं रहती है। इतना ही नहीं रात के समय उनके वार्ड में कोई अटेंडेंट नहीं रहता है। ऐसे में प्रसूताओं की सुरक्षा राम भरोसे रहती है।
गांव छपकौली निवासी फरहीन ने बताया कि नाश्ते में कच्चा दूध मिलता है, जिसे पीना नुकसानदायक है। दोपहर के समय बहुत कम खिचड़ी मिली है। इससे पेट नहीं भर पाता है।
--फोटो फाइल संख्या 06एचपीआर पीएच-07
गांव कुराना निवासी साजमा ने बताया कि दोपहर के समय खिचड़ी अच्छी गुणवत्ता की नहीं थी। बहुत कम खिचड़ी मिली है, इससे पेट तक नहीं भर पाया। सुबह के समय नाश्ता भी काफी लेट मिला था।
-फोटो फाइल संख्या 06एचपीआर पीएच-08
गांव भटियाना निवासी शबनम ने बताया कि रात के समय सुरक्षा भी राम भरोसे रहती है। खाना अच्छी गुणवत्ता का नहीं मिल पा रहा है। नाश्ते में उन्हें मक्खन भी नहीं मिल सका है।
--फोटो फाइल संख्या 06एचपीआर पीएच-09
डिप्टी सीएमओ डा. प्रवीण शर्मा ने बताया कि प्रत्येक प्रसूता को खाना उपलब्ध कराने के लिए 100 रुपये का बजट खर्चा जाता है। इतने बजट में अच्छी गुणवत्ता का खाना मिलना चाहिए। इसकी वह जांच करेंगे, लापरवाही पर कार्रवाई होगी।