शहर-देहात के लोगों का गला तर करने के लिए जल निगम ने पेयजल योजनाओं पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। फिर भी कई जगहों पर लोग दूषित पानी पीने को अभिशप्त हैं। अब जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर शासन ने सपा शासन में हुए इन कार्यों की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच जिला प्रशासन के अधिकारी करेंगे। इस आदेश से जल निगम के अफसरों और ठेकेदारों में हड़कंप है।
दरअसल, पाइप लाइन में लीकेज तथा हैंडपंपों को लगाने के नाम पर हुई लूटखसोट पर शासन ने जांच बिठा दी है। योजना के तहत ओवर हैड टैंक की गुणवत्ता और बिछाई गयी पाइप लाइन में घटिया पाइपों के इस्तेमाल की शिकायत के बाद जिला स्तरीय अधिकारियों को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
सपा शासन काल में शहर और देहात क्षेत्र में भी पाइप के जरिए घर-घर शुद्ध पानी मुहैया कराने की योजना शुरू की गई थी। जिले में 54 पाइप पेयजल परियोजना लगाने का निर्णय लिया गया। जिनमें 44 गांव में व 10 योजनाओं का देहात क्षेत्र में निर्माण शुरू किया गया।
इनमें से अधिकतर का निर्माण हो चुका है। जबकि कुछ निर्माणाधीन हैं। इस योजना पर करीब 70 करोड़ रुपये पानी की बहा दिए गए। जबकि अभी भी कुछ बजट आवंटित होना बाकी है।
मुख्यमंत्री से हुई मामले की शिकायत
पाइप पेयजल योजना के तहत हुए निर्माण में ओवर हैड टैंक की गुणवत्ता के साथ घटिया स्तर के पाइप का प्रयोग हुआ। अधिकतर पाइप टूटे होने के कारण घरों में नालियों का दूषित पानी पहुंच रहा है। जनप्रतिनिधियों ने मामले को मुख्यमंत्री के दरबार में उठाया।
जिसके बाद सीएम ने मंडलायुक्त को मामले में जांच के आदेश दिए। सीएम से आदेशों के बाद मंडलायुक्त ने मंडल के सभी जिलाधिकारियों को जिला स्तर अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
हैंडपंपों की भी होगी जांच -
जिले में विभिन्न योजना के तहत 11690 हैंडपंप लगाए गए हैं। जबकि 200 रिबोर किए गए हैं। इसके अलावा 475 हैंडपंपों की मरम्मत का रिकार्ड है। शासन द्वारा इन हैंडपंपों की स्थिति और इन पर खर्च की गयी धनराशि की जांच के भी आदेश दिए हैं।
मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने बताया कि पाइप पेयजल योजना के अन्तर्गत गुणवत्ता और घटिया सामग्री प्रयोग करने की शिकायतें आयी हैं। जिसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।