मासूमों को बांट दिए एक्सपायर डेट के आयरन सीरप
गढ़मुक्तेश्वर। आयरन की कमी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम क ो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने मासूमों को एक्सपायर हो चुके आयरन सीरप बांट दिए, जिसका भंडाफोड़ होने से गुस्साए ग्रामीणों ने हंगामा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की लापरवाही बता अपना पल्ला झाड़ लिया।
आयरन की कमी से शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होने के साथ ही बच्चों में कई तरह की बीमारी भी लग जाती हैं, जिनकी रोकथाम को शासन ने बच्चों में आयरन की कमी को दूर करने के लिए उन्हें आयरन सीरप बांटने की योजना चलाई हुई है। जिसके तहत सिंभावली क्षेत्र के गांव राजपुर में बृहस्पतिवार को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सैकड़ों बच्चों को आयरन के सीरप बांट दिए। जागरूक अभिभावकों ने जब आयरन सीरप की जांच पड़ताल की, तो उन पर मई 2018 की एक्सपायरी डेट अंकित देख उनके होश उड़ गए। कुछ ही देर में दर्जनों ग्रामीण मैन चौक पर एकत्र हो गए, जिन्होंने सरकारी स्तर से हुई इस संगीन चूक के विरोध में प्रदर्शन किया। नाजिम, ताजू, ओरंगजेब, वसीम, मतलूब, दानिश, अब्दुल, गुलशेर, फरगहत, मजहर, आकिब, वसीम, अब्दुल रेशमा, शबाना, रिहाना, सलमा ने एक्सपायरी डेट वाले आयरन सीरप बांटने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई कराने की मांग की। पीएचसी प्रभारी डॉ. शशि भूषण का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को गांवों में आयरन सीरप बांटने को दिए गए थे। लेकिन वितरण में किस तरह देरी हुई है और फिर एक्सपायरी डेट बीतने पर उन्हें किसी भी जांच पड़ताल के बिना क्यों बांट दिया गया, इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इस चूक के लिए आंगनबाड़ी विभाग ही जिम्मेदार है। वहीं गढ़ सीएचसी अधीक्षक डॉ. एसके तेवतिया का कहना है कि बच्चों को एक्सपायरी डेट वाले आयरन सीरप बांटना बेहद गंभीर चूक है, हालांकि इसके सेवन से कोई संगीन बीमारी लगने की बजाए बच्चों के शरीर में दाने निकलने के साथ ही एलर्जी भी हो सकती है।