दूषित हो रहे भूजल को लेकर एनजीटी सख्त
गढ़मुक्तेश्वर। दूषित हो रहे भूजल को लेकर एनजीटी ने सख्त रूख अपनाते हुए वेस्टर्न यूपी से जुड़ीं तीन नदियों के गहन सर्वेक्षण के आदेश दिए हैं। साथ ही भूजल दूषित कर रहीं फैक्ट्रियों की जांच का भी आदेश दिया है। दूसरी ओर गंगा में गिर रहे दूषित नालों के आरोपियों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई करने में नाकाम है।
सामाजिक संगठन दोआबा पर्यावरण समिति ने जनहित याचिका दायर कर दूषित भूजल से कैंसर की चपेट में आकर वेस्टर्न यूपी में दर्जनों लोगों की मौत होने का उल्लेख किया है। संगठन ने यह भी उल्लेख किया है कि फैक्ट्रियों द्वारा रिवर्स बोरिंग के माध्यम से छोड़े जा रहे अपशिष्टों से हापुड़, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद समेत कई जिलों का भूजल दूषित होने से बीमारी फैल रही हैं। इस याचिका की सुनवाई के बाद एनजीटी ने वेस्टर्न यूपी से जुड़ीं कृष्णा, काली, हिंडन नदी के गहन सर्वेक्षण के साथ ही भूजल को दूषित कर रहीं फैक्ट्रियों की जांच कराने का भी आदेश दिया है।
एक साल में दर्जनों की हो चुकी है मौत
फैक्ट्रियों का जहरीला पानी जिस वैकल्पिक नाले के माध्यम से पूठ गंगा में गिर रहा है। वह दर्जन गांवों की सीमा से होकर निकल रहा है। इससे भूजल दूषित हो रहा है। दूषित पानी से कैंसर समेत कई बीमारी फैल रही हैं जो एक साल के भीतर क्षेत्र में महिलाओं समेत 70 से भी अधिक लोगों को मौत की नींद सुला चुकी है। बीमारी का सर्वाधिक कहर सिंभावली, बक्सर, अल्लाबख्शपुर, मानकचौक, हशूपुर, पसवाड़ा, वैट, पूठ, सेहल, जखैड़ा, सलोनी, फुलडेहरा समेत तीन दर्जन गांवों में फैला हुआ है। इनमें से अधिकांश गांवों में अभी तक टंकी नहीं बनी है।
एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य का कहना है कि गंगा में गिर रहे दूषित नालों की अविलंब जांच पड़ताल कराकर उनकी रोकथाम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ रणनीति बनाकर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। जबकि भूजल दूषित होने वाले गांवों में जल निगम की टीम भेजकर पानी के नमूनों की जांच भी कराई जाएगी।