रंगों से होगी ओडीएफ गांवों की पहचान
-ओडीएफ गांवों को हरे, नारंगी और लाल रंगों से किया जाएगा कोडिड
-रंगों के आधार पर टास्क फोर्स ओडीएफ गांवों में चलाएंगी अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। अब ओडीएफ गांवों की पहचान रंगों से होगी। इसके लिए प्रशासन रंगों के हिसाब से गांवों को कोड करेगा। इन रंगों के हिसाब से गठित टास्क फोर्स ओडीएफ गांवों की निगरानी करेगी। इससे यह पता चल पाएगा कि गांव कितना खुले में शौच मुक्त हुआ है।
शासन के आदेश पर जिला पंचायत राज विभाग गांवों को रंगों से कोड करेगा। ओडीएफ घोषित हो चुके गांवों में खुले में शौच की क्या स्थिति है, इसका इन रंगों के आधार पर पता चलेगा। इसके लिए जिला स्वच्छता समिति टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है।
ग्राम पंचायतों की संख्या के हिसाब से टास्क फोर्स 15 से 25 सदस्यों की होगी। इसमें एनजीओ, निगरानी समिति, ट्रिगरिंग टीम के सदस्य, स्वच्छाग्रही, जागरूक ग्रामीण आदि शामिल होंगे। यह फोर्स चेकलिस्ट के माध्यम से ओडीएफ गांवों की स्थिरता का आकलन करेगी।
खुले में शौचमक्त गांवों की स्थिरता रहे व परिवार के प्रत्येक सदस्य शौचालय का प्रयोग करे, इसे सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर गठित जीपीडीपी टास्क फोर्स में निगरानी सदस्यों की संख्या बढ़ेगी। उसके बाद भी व्यक्ति नहीं मानता है तो उस पर जुर्माना होगा।
डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि गांवों में ओडीएफ की निरंतरता बनी रहे। इसके लिए गांवों को रंगों के हिसाब से जाना जाएगा और उनमें उसी हिसाब से प्रयास किए जाएंगे।
गांवों को दिए जाएंगे रंगों के आधार पर कोड
हरा रंग - मतलब गांव में ओडीएफ की निरंतरता बनी है। नारंगी रंग- ओडीएफ गांव में खुले में शौच की संभावना है। ऐसे में निगरानी की आवश्यकता है।
लाल रंग- गांव में लोग फिर से खुले में शौच जाने लगे हैं।